जालौन: जालौन-गरौठा-भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद नारायण दास अहिरवार एक कथित टिप्पणी को लेकर विवादों में घिर गए हैं। धानुक समाज के लोगों ने आरोप लगाया है कि सांसद ने संसद सत्र के दौरान ऐसे शब्द का प्रयोग किया, जिसे समुदाय विशेष के लिए अपमानजनक और जातिसूचक माना जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन, सख्त कार्रवाई की मांग
भारतीय धानुक समाज के जिलाध्यक्ष सोबरन सिंह कठेरिया के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में सुंदर सिंह दीवान और संजू कठेरिया समेत कई लोग शामिल रहे। ज्ञापन में कहा गया है कि 23 मार्च 2026 को संसद सत्र के दौरान सांसद द्वारा की गई टिप्पणी से पूरे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और इसे लेकर व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
सामाजिक सम्मान और पहचान का मुद्दा
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि धानुक समाज को पूरे उत्तर प्रदेश और देशभर में सम्मानजनक नामों से जाना जाता है। यह समुदाय लंबे समय से सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रयासरत है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक समरसता के भी खिलाफ है।
डेढ़ लाख मतदाताओं का प्रभाव
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जालौन, गरौठा और भोगनीपुर क्षेत्र में धानुक समाज के करीब डेढ़ लाख मतदाता हैं। अनुसूचित जाति वर्ग में यह समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समाज के लोगों ने इस टिप्पणी को असहनीय बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है।
प्रशासनिक मांगें भी उठीं
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर सांसद के खिलाफ मानहानि और अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही तहसील स्तर पर राजस्व अधिकारियों को धानुक जाति के प्रमाण पत्र जारी करने के स्पष्ट निर्देश देने की भी मांग की गई है, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
कई उच्च अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, झांसी मंडलायुक्त और जिलाधिकारी जालौन को भी भेजी गई है। मामले को लेकर क्षेत्र में सियासी हलचल लगातार बढ़ रही है।
आख़िर सांसद ही क्यों दे रहे ऐसे जातीय बयान? धानुक समाज हो गया नाराज़, विवाद बढ़ा
