जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में तैनात 2023 बैच के IAS अधिकारी और वर्तमान एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही का एक छह पन्नों का पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पत्र उन्होंने नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा है, जिसमें अपने तबादले, वर्तमान तैनाती, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कार्य परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। पत्र में रिंकू सिंह राही ने कहा है कि एसडीएम (न्यायिक) के पद पर प्रतिदिन लगभग चार घंटे का ही कार्य रहता है। उनका कहना है कि यदि शासन को यह व्यवस्था उचित लगती है तो उन्हें आधे दिन के कार्य के अनुरूप आधा वेतन दिए जाने में भी कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने लिखा है कि यह प्रस्ताव किसी विरोध के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के तहत रखा गया है।
जांच पूरी होने से पहले तबादले पर सवाल
रिंकू सिंह राही ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि जिस मामले की जांच चल रही थी, उसकी रिपोर्ट आने से पहले ही उनका स्थानांतरण कर दिया गया। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निष्पक्ष जांच पूरी होने के बाद ही ऐसे निर्णय लिए जाने चाहिए थे। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली, विशेषकर जनता दर्शन व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पत्र के अनुसार, कई मामलों में समस्याओं के स्थायी समाधान के बजाय केवल औपचारिक निस्तारण किया जाता है।
दूसरे जिले या राज्य कैडर में तैनाती का अनुरोध
पत्र में IAS अधिकारी ने अनुरोध किया है कि यदि संभव हो तो उन्हें जालौन की किसी अन्य तहसील या किसी दूसरे जिले में नियमानुसार कार्य करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने यह भी लिखा कि यदि ऐसी व्यवस्था संभव न हो तो नियमों के अनुसार किसी अन्य राज्य कैडर में स्थानांतरण पर भी विचार किया जाए, ताकि वे संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें।
22 जुलाई से आधा वेतन लेने की सहमति
रिंकू सिंह राही ने अपने पत्र में लिखा है कि अंतिम निर्णय होने तक वह 22 जुलाई 2026 से आधे दिन के कार्य के अनुरूप आधा वेतन स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अनुरोध किया है कि इसे अनुशासनहीनता नहीं बल्कि सद्भावना और नैतिक प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाए।
अतिक्रमण कार्रवाई में हस्तक्षेप का भी आरोप
पत्र में उन्होंने यह भी दावा किया है कि अवैध कब्जों और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उन्हें प्रशासनिक स्तर पर बाधाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक बैठक के दौरान भाजपा विधायक गौरीशंकर वर्मा की मौजूदगी में जिलाधिकारी द्वारा कार्रवाई रोकने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का नाम लेते हुए एक मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित होने का भी आरोप लगाया है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, पत्र में लगाए गए सभी आरोप रिंकू सिंह राही के व्यक्तिगत दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। समाचार लिखे जाने तक जिलाधिकारी, संबंधित जनप्रतिनिधियों या राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और शासन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
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