छतरपुर: सरकारी जमीन का रिकॉर्ड अगर सरकारी दफ्तरों की निगरानी में ही बदल जाए, तो सवाल सिर्फ एक गलती का नहीं रहता, बल्कि पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठता है। छतरपुर जिले की राजनगर तहसील में स्वामित्व योजना के तहत हुए सर्वे को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग ने आरोप लगाया है कि सर्वे के दौरान सरकारी और वन विभाग की जमीन को निजी लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया।
मामला 16 सितंबर 2026 को सामने आने के बाद राजस्व रिकॉर्ड और सर्वे प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 अभियान भी शुरू किया गया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
टाइगर रिजर्व की चौकी-क्वार्टर भी निजी नामों में दर्ज होने का आरोप
मीडिया पड़ताल में सामने आए मामले के मुताबिक छतरपुर-पन्ना नेशनल हाईवे-39 पर चंद्रनगर चौराहे के पास पन्ना टाइगर रिजर्व की पुरानी चौकी और क्वार्टर की जमीन को निजी लोगों के नाम दर्ज किए जाने का आरोप है। बताया गया है कि करीब 155 वर्ग मीटर और 47 वर्ग मीटर जमीन पर लंबे समय से वन विभाग की चौकी और क्वार्टर मौजूद हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में यह जमीन शिवराजपुर निवासी दुर्गादत्त पाठक और उत्कर्ष पाठक के नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। अगर रिकॉर्ड में दर्ज यह स्थिति सही पाई जाती है, तो यह मामूली तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि सरकारी भूमि के रिकॉर्ड की गंभीर गड़बड़ी का मामला बन सकता है।

रेंजर ने अधिकारियों को लिखा पत्र
मामला सामने आने के बाद चंद्रनगर रेंजर रामप्रसाद प्रजापति ने तहसीलदार, बमीठा थाना प्रभारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई है। रेंजर ने कथित तौर पर संबंधित रिकॉर्ड/पट्टा निरस्त करने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि जिस जमीन पर वन विभाग की संपत्ति दशकों से मौजूद है, उसका सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करते समय मौके की स्थिति की जांच कैसे हुई?

सीएम राइज स्कूल के शिक्षक सदन पर भी सवाल
मामला केवल वन विभाग की जमीन तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। चंद्रनगर स्थित सीएम राइज स्कूल के शिक्षक सदन की जमीन को लेकर भी रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप सामने आया है। बताया गया है कि स्कूल के शिक्षकों ने अपनी मेहनत की कमाई और आपसी सहयोग से करीब 30×30 फीट क्षेत्र में शिक्षक सदन का निर्माण कराया था। अब इसी जमीन के रिकॉर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्कूल के प्राचार्य धीरज त्रिपाठी ने सरकारी संपत्ति पर कथित कब्जे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मामले की शिकायत कलेक्टर और तहसीलदार से की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी।

तहसीलदार बोले- ड्रोन सर्वे में हुई मानवीय भूल
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच राजनगर तहसीलदार धीरज गौतम ने इसे मानवीय भूल बताया है। उनके अनुसार बंद पड़े स्कूल के पास निजी आबादी की जमीन होने के कारण ड्रोन सर्वे के दौरान नक्शे में गलती हुई। वहीं पन्ना टाइगर रिजर्व की जमीन के संबंध में उनका कहना है कि सर्वे के प्रकाशन के समय किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। तहसीलदार के मुताबिक अब मामला सामने आने के बाद रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल: सरकारी जमीन का रिकॉर्ड इतनी आसानी से कैसे बदला?
स्वामित्व योजना का मकसद जमीन और संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करना है। ऐसे में यदि सर्वे के दौरान सरकारी या वन विभाग की जमीन निजी नामों में दर्ज होने की शिकायत सामने आती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। खासकर तब, जब मौके पर सरकारी भवन, चौकी या अन्य सार्वजनिक संपत्ति पहले से मौजूद होने का दावा किया जा रहा हो। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं। यह पता लगाना जरूरी होगा कि रिकॉर्ड में कथित बदलाव केवल सर्वे की तकनीकी/मानवीय त्रुटि था या इसके पीछे किसी स्तर पर लापरवाही हुई। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका थी। सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में एक गलती भी भविष्य में बड़े विवाद का कारण बन सकती है। इसलिए इस मामले में केवल रिकॉर्ड सुधार काफी होगा या जिम्मेदारी भी तय होगी, यह प्रशासन की अगली कार्रवाई से साफ होगा।

