झांसी: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पर्चे को लेकर झांसी के एक दंपती का दावा सामने आया है। मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र श्रीवास का कहना है कि मई 2024 में बागेश्वर धाम में बनाए गए पर्चे पर उनकी पत्नी से जुड़ी परेशानियों के साथ ‘पुत्र योग’ बनने की बात लिखी गई थी। हालांकि, 11 जून 2026 को उनके घर चौथी संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ।
राजेंद्र का कहना है कि पर्चे में लिखी बात के बाद परिवार में बेटे को लेकर उम्मीद बनी और उन्होंने आगे संतान की योजना बनाई। बेटी के जन्म के बाद उन्होंने इस दावे पर सवाल उठाते हुए अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से संपर्क किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में पुलिस शिकायत की तैयारी की बात भी सामने आई है।
पत्नी की परेशानी को लेकर पहुंचे थे बागेश्वर धाम
राजेंद्र श्रीवास के मुताबिक, वर्ष 2024 में वह पत्नी की शारीरिक और मानसिक परेशानियों को लेकर बागेश्वर धाम गए थे। कई बार धाम जाने के बाद मई 2024 में उनका पर्चा बनाए जाने का दावा किया गया। राजेंद्र का कहना है कि पर्चे में उनकी पत्नी को वर्ष 2019 से ‘प्रेत बाधा’ होने की बात लिखी गई थी। इसी के साथ आगे ‘पुत्र योग बनता है’ लिखा होने का भी उनका दावा है। उस समय दंपती की तीन बेटियां थीं और परिवार की ओर से चौथे बच्चे की कोई योजना नहीं थी। राजेंद्र के अनुसार, पर्चे में पुत्र योग की बात देखने के बाद उनके परिवार में बेटे को लेकर उम्मीद पैदा हुई।
पर्चे की बात के बाद परिवार बढ़ाने का फैसला
राजेंद्र के मुताबिक, पर्चे पर लिखी बात और वहां कही गई बातों से उन्हें भरोसा हुआ कि अगली संतान बेटा होगी। उनका कहना है कि इसी विश्वास के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने चौथे बच्चे की योजना बनाई। लेकिन 11 जून 2026 को जब बच्चे का जन्म हुआ तो वह बेटी थी। यह उनकी चौथी बेटी थी। राजेंद्र के अनुसार, इसके बाद उन्हें पर्चे में लिखी ‘पुत्र योग’ वाली बात पर सवाल खड़ा करने की जरूरत महसूस हुई।
बेटी के जन्म के बाद दोबारा धाम पहुंचे
राजेंद्र का दावा है कि बेटी के जन्म के करीब तीन महीने बाद वह अपनी पत्नी और बच्ची के साथ दोबारा बागेश्वर धाम पहुंचे। उनका कहना है कि वह पुराने पर्चे को लेकर यह जानना चाहते थे कि उसमें लिखी बात सही क्यों नहीं हुई। राजेंद्र के मुताबिक, उन्होंने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने अपनी बात रखने की कोशिश की। उनका आरोप है कि पर्चा देखने के बाद उन्हें कथित तौर पर ‘गलती’ होने की बात कही गई। इसके बाद वहां मौजूद सेवादारों ने उन्हें भीड़ न लगाने की बात कहते हुए नीचे जाने के लिए कहा। इस पूरे घटनाक्रम का यह हिस्सा फिलहाल राजेंद्र के दावे पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘हम धर्म के खिलाफ नहीं हैं’
राजेंद्र श्रीवास का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म, भगवान या धार्मिक आस्था के खिलाफ जाना नहीं है। वह केवल अपना अनुभव लोगों के सामने रखना चाहते हैं, ताकि लोग किसी भी दावे को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय उसके बारे में स्वयं विचार करें। उनके परिवार में अब चार बेटियां हैं। राजेंद्र का कहना है कि वह अपनी सभी बेटियों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से किया संपर्क
मामला सामने आने के बाद राजेंद्र ने अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से संपर्क किया। उनका कहना है कि उन्होंने समिति को अपने अनुभव की जानकारी इसलिए दी, ताकि इस तरह के दावों को लेकर समाज में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता पर चर्चा हो सके। हालिया रिपोर्टों में समिति की ओर से मामले की जानकारी जुटाने और दावों की जांच की जरूरत की बात सामने आई है। पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होने की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
बागेश्वर धाम की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी सामने आया पक्ष मुख्य रूप से राजेंद्र श्रीवास और उनके परिवार के दावे पर आधारित है। बागेश्वर धाम या पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से इस विशेष मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
पर्चा वाले बाबा की खुल गयी पोल! झाँसी की दंपती का दावा, बताया पुत्र हुई पुत्री
