राकेश टिकैत ने इस फॉर्मूले के तहत रखी मांगे, बिजली निजीकरण का विरोध

जालौन: उरई स्थित गल्ला मंडी में शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन की किसान महापंचायत में बुंदेलखंड के किसानों से जुड़े कई बड़े मुद्दे उठे। दोपहर करीब 1 बजे आयोजित पंचायत को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संबोधित किया। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से बुंदेलखंड के लिए अलग विशेष पैकेज घोषित करने, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को अतिरिक्त राहत देने और क्षेत्र के किसानों की कर्जमाफी की मांग की।

पंचायत में अतिवृष्टि से फसल और मकानों को हुए नुकसान के अलावा खाद-बीज की उपलब्धता, बिजली, अन्ना मवेशी और किसानों की आर्थिक स्थिति जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड लंबे समय से सूखा, अतिवृष्टि और कृषि संकट जैसी परिस्थितियों का सामना करता रहा है। उनका कहना था कि नुकसान के बाद किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिलने से आर्थिक दबाव बढ़ता है और पलायन की स्थिति पैदा होती है।

बुंदेलखंड के लिए अलग पैकेज की मांग

राकेश टिकैत ने कहा कि बुंदेलखंड की परिस्थितियां दूसरे क्षेत्रों से अलग हैं, इसलिए यहां के लिए अलग आर्थिक पैकेज की जरूरत है। उन्होंने सरकार से ऐसा पैकेज लाने की मांग की, जिससे किसानों को तत्काल राहत के साथ सिंचाई, कृषि और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ सकें। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने के पुराने सरकारी दावे का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों की आय उस स्तर तक नहीं पहुंची है। टिकैत ने बुंदेलखंड के किसानों पर बढ़ते कर्ज का मुद्दा उठाते हुए कर्जमाफी की मांग भी रखी।

खनिज संपदा से स्थानीय लोगों को मिले हिस्सा

किसान पंचायत में बुंदेलखंड की खनिज संपदा का मुद्दा भी उठा। टिकैत ने कहा कि क्षेत्र से निकलने वाले खनिज संसाधनों से होने वाली आय का लाभ स्थानीय लोगों और क्षेत्र के विकास में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने खनिज संसाधनों से प्राप्त राजस्व के उपयोग में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सी2+50 प्रतिशत फार्मूला लागू करने की मांग दोहराई।

बिजली निजीकरण का विरोध, किसानों के लिए सस्ती बिजली की मांग

टिकैत ने बिजली व्यवस्था के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि इसका असर कृषि लागत पर पड़ सकता है। उन्होंने किसानों को पर्याप्त, निर्बाध और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने देशभर के साथ बुंदेलखंड में जमीनों के सर्किल रेट के पुनरीक्षण की बात भी कही। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लंबे समय से नहीं बढ़ाए गए सर्किल रेट की समीक्षा की जानी चाहिए।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जताई चिंता

किसान नेता ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापारिक समझौते को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक समझौते का कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला प्रभाव पहले देखा जाना चाहिए। टिकैत ने ऐसे प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की, जिनसे भारतीय किसानों को नुकसान की आशंका हो।

चुनाव आयोग को लेकर टिकैत ने लगाए आरोप

पंचायत में राकेश टिकैत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश में वोटों की चोरी हो रही है और चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। टिकैत ने चुनाव परिणामों के संबंध में भी कई आरोप लगाए और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का समर्थन किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

2027 में किसी दल का समर्थन नहीं करेगी भाकियू

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर टिकैत ने कहा कि वह खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय किसान यूनियन किसी राजनीतिक दल के समर्थन में खड़ी नहीं होगी। उनके मुताबिक जनता अपने स्तर पर चुनाव को लेकर फैसला करेगी। उन्होंने युवाओं से आगे आने की अपील करते हुए कहा कि बदलाव की प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

किसान आंदोलन की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात

राकेश टिकैत ने 2020-21 के किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस आंदोलन के दौरान उठाई गई कई मांगें अभी भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को लेकर संगठन सरकार के सामने अपनी बात रखता रहेगा और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग जिलों में आंदोलन किया जाएगा।

बड़ी संख्या में किसान पहुंचे पंचायत में

उरई की किसान महापंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार, प्रदेश अध्यक्ष शर्मा, जिलाध्यक्ष डॉ. द्विजेंद्र निरंजन और पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेश राजपूत समेत संगठन के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

उरई की इस पंचायत में स्थानीय कृषि समस्याओं से लेकर बिजली, खनिज संपदा, MSP, व्यापार समझौते और चुनाव प्रक्रिया जैसे राष्ट्रीय मुद्दों तक पर चर्चा हुई। भाकियू ने किसानों की मांगों को आगे भी सरकार के सामने उठाने और जरूरत के अनुसार आंदोलन की रणनीति जारी रखने की बात कही।

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