कमीशन में 1.70 लाख लेने के बाद भी ठप कर दी पंचायत, जालौन के मलकपुरा में सचिव का खेल

gram panchayat Malakpura

जालौन। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर कथित कमीशनखोरी का एक मामला जालौन की ग्राम पंचायत मलकपुरा से सामने आया है। मलकपुरा के प्रधान अमित ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट में पंचायत सचिव जितेंद्र पटेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से अलग-अलग वित्तीय वर्षों के विकास कार्यों, उनकी लागत और कथित कमीशन की रकम का ब्योरा दिया है। प्रधान अमित का दावा है कि करीब 30 महीने के कार्यकाल में पंचायत सचिव को 1 लाख 70 हजार 300 रुपये कमीशन के रूप में दिए गए। उन्होंने यह भी कहा है कि कुछ छोटे-मोटे खर्च इस हिसाब में शामिल नहीं हैं, इसलिए कुल रकम बढ़ सकती है।

सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग के काम का हिसाब
पोस्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण, अंबेडकर स्मारक के नवीनीकरण, पंचायत भवन की मरम्मत और अन्य विकास कार्यों के लिए कथित कमीशन दिए जाने का उल्लेख है। इस अवधि के लिए 1,10,800 रुपये कमीशन और अन्य खर्चों के नाम पर 26 हजार रुपये दिए जाने का दावा किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 22,500 रुपये कथित कमीशन और तीन हजार रुपये अन्य खर्चों के नाम पर दिए जाने का विवरण है। वर्ष 2026-27 के कुछ कार्यों का हिसाब भी दस्तावेज में शामिल है।

छात्राओं की ई-रिक्शा सेवा बंद होने का भी आरोप
प्रधान ने पंचायत में छात्राओं के लिए मुफ्त ई-रिक्शा सेवा और घर-घर कूड़ा संग्रहण जैसी सुविधाएं बंद होने का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि पंचायत सचिव के साथ विवाद के चलते ये सेवाएं प्रभावित हुईं। इस मामले पर उन्होंने छात्राओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार और उनके फोन नंबर ब्लैकलिस्ट किए जाने का आरोप भी सचिव पर लगाया है। ये ई-रिक्शा कक्षा 9 और उससे ऊपर पढ़ने वाली गरीब बच्चे-बच्चियों को पड़ोस के गांव स्थित स्कूल छोड़ने और ले आने का काम करता है. बच्चों को इसके लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता है. जब से ये रिक्शा बंद हुआ है, बच्चियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पांच प्रतिशत कमीशन की बात नहीं मानी
प्रधान अमित ने बताया कि उन्होंने लगातार अपनी ग्राम पंचायत में कार्यों को भ्रष्टाचार से दूर रखने के प्रयास किए लेकिन इस चक्कर में सालों तक उनकी ग्राम पंचायत के विकास कार्य ठप पड़े रहे। ऐसे में उन्हें मजबूरन सिस्टम की चली आ रही व्यवस्था में कमीशन देना पड़ा। हालांकि उन्होंने कहा है कि उन्होंने कमीशन की दर पांच प्रतिशत करने की बात कही थी, लेकिन पंचायत सचिव इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनके अनुसार, कुछ कार्यों में सात से नौ प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ा। प्रधान अमित ने अपने दस्तावेज में पंचायत में भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाने की जिम्मेदारी खुद भी स्वीकार की है। उन्होंने दावा किया है कि इस संबंध में अधिकारियों को पहले भी चेतावनी दी गई थी।

पंचायत सचिव की प्रतिक्रिया और बुंदेलखंड रिपोर्ट की पड़ताल
बुंदेलखंड रिपोर्ट ने जब इस मामले पर पंचायत सचिव की प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन पर बात की और उनसे पूछा कि 26 मई के बाद मलकपुरा पंचायत में कौन-कौन से नए कार्य कराए गए और यदि काम नहीं हुए, तो इसकी वजह क्या है?

इस पर पंचायत सचिव जितेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधान की भूमिका प्रशासक के रूप में होने के बाद उनके पास 26 मई के बाद नए कार्य कराने का अधिकार नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि अन्य पंचायतों में भी इस अवधि के बाद नए काम नहीं कराए गए. केवल उन्हीं कार्यों को कराया गया, जिनकी स्वीकृति पहले से मिल चुकी थी. हालांकि भारत सरकार के ई-ग्रामस्वराज पर ये साफ देखा जा सकता है कि जितेंद्र जिन अन्य ग्राम पंचायतों में सचिव का प्रभार संभाल रहे हैं वहां कार्य हो रहे हैं, बस मलकपुरा पंचायत को इससे अलग रखा जा रहा है. इसके अलावा 26-मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत में कोई नए कार्य नहीं होंगे, ऐसी कोई नीति सामने नहीं आई है. यानी यहां पंचायत सचिव का जवाब तथ्यों के अनुसार नहीं है.

बच्चियों को स्कूल पहुंचाने के लिए चलने वाले ई-रिक्शे को बंद क्यों करवाया गया, इस मामले पर पंचायत सचिव जितेंद्र ने कहा कि उन्होंने बच्चियों के लिए ई-रिक्शा चलाने पर कभी सहमति नहीं दी थी. उनका तर्क है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी से बच्चियों को ले जाना मोटर व्हीकल एक्ट के तहत उचित नहीं है। सचिव ने यह आरोप भी लगाया कि हाल के दिनों में ई-रिक्शे का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया गया और उसे किराये पर चलवाया जा रहा था। वहीं साक्ष्य बताते हैं सितंबर-2024 से चल रहा यह रिक्शा इस तरह से डिजाइन कराया गया था, कि इससे घर-घर कूड़ा उठाने के अलावा ये रिक्शा, पौधों में सिंचाई के काम करता है और बच्चियों को स्कूल पहुंचाता है। ई-ग्रामस्वराज में इसके लिए लगातार पैसा भी दिया जा रहा है. जब ये रिक्शा शुरु हुआ था, तब एक प्रमुख समाचार पत्र में खबर भी प्रकाशित हुई थी और जिले के सभी अधिकारियों को पंचायत की इस पहल के बारे में भी जानकारी भी थी और उन्होंने इसे सराहा भी था. 31-अगस्त-2026 और उसके बाद भी रिक्शे का संचालन इसी तरह होता आया है, 31-अगस्त को ही पंचायत सचिव ने रिक्शा रोक देने का संदेश भेजा था. इसलिए पंचायत सचिव का जवाब यहां भी गोलमोल ही दिखाई दे रहा है.

ग्राम प्रधान अमित ने एक अन्य फेसबुक पोस्ट में रिक्शे के कार्यों में रिक्शे के अन्य छोटे-मोटे कार्यों का करना भी बताया है, जिसके बदले किराया वसूल भी किया जाता है. यहां ये बाद रोचक है कि इन ई-रिक्शे के किराए की रसीदों पर पंचायत सचिव के हस्ताक्षर भी हैं, जिससे वे अब इनकार कर रहे हैं. कूड़ा कलेक्शन, पौधों की सिंचाई एवं पंचायत के अन्य कार्यों में रिक्शे का इस्तेमाल होता था, तो फिर इसके लिए क्यों बंद किया गया, इसका स्पष्ट जवाब भी पंचायत सचिव जितेंद्र नहीं दे पाए.

कमीशन लेने के आरोप पर सचिव का कहना है कि प्रधान अमित अगर साक्ष्य सामने रखेंगे तो वे इस मामले पर जवाब देंगे जबकि इससे संबंधित पर्याप्त साक्ष्य बुंदेलखंड रिपोर्ट के पास मौजूद हैं जिनमें वे वाट्सएप चैट पर कमीशन मांगते नज़र आ रहे हैं. इसके अलावा ई-ग्रामस्वराज भी भी कुछ ऐसे पेमेन्ट्स दिख रहे हैं, जो रिजेक्ट किए गए हैं. प्रधान अमित के अनुसार ये वही रिजेक्टेड पेमेंट्स हैं, जिन्हें कमीशन के एक छोटे हिस्से के तौर पर पंचायत सचिव मांगते थे.

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