जालौन: उरई के राजकीय मेडिकल कॉलेज में चल रहा विवाद अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। जिस मामले में पहले तीमारदारों के साथ मारपीट के आरोपों को लेकर व्यापारियों और भाजपा नेताओं ने मेडिकल कॉलेज के खिलाफ मोर्चा खोला था, अब उसी मामले में जूनियर डॉक्टर भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
मेडिकल कॉलेज परिसर में जूनियर डॉक्टरों ने ‘मौन प्रदर्शन’ शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान उनके साथ अभद्रता और हमला किया गया, जिससे पूरे मेडिकल स्टाफ में डर और आक्रोश का माहौल है। डॉक्टरों ने मांग की है कि आरोपित तीमारदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 (BNS 109) के तहत जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज किया जाए। देश के सबसे बड़े डॉक्टर संगठन Indian Medical Association ने भी खुलकर जूनियर डॉक्टरों के समर्थन का ऐलान कर दिया है।
पहले क्या हुआ था?
बीते दिनों उरई मेडिकल कॉलेज में इलाज को लेकर मरीज के तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप लगे कि मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टरों और स्टाफ ने भाजपा नेता एवं व्यापारी बृजकिशोर गुप्ता और उनके बेटे के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद उरई शहर में भारी आक्रोश देखने को मिला। व्यापारिक संगठनों ने बाजार बंद कराया, महिलाओं ने प्रदर्शन किया और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हुई। मामला इतना बढ़ा कि स्थानीय विधायक गौरी शंकर वर्मा ने लखनऊ पहुंचकर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की और पूरे मामले की शिकायत की।
अब डॉक्टरों ने खोला मोर्चा
इधर, लगातार विरोध और कार्रवाई की मांग के बीच अब जूनियर डॉक्टर भी एकजुट हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि ड्यूटी के दौरान मेडिकल स्टाफ सुरक्षित नहीं रहेगा तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी। इसी को लेकर अस्पताल परिसर में शांतिपूर्ण ‘मौन प्रदर्शन’ शुरू किया गया है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें:
तीमारदारों पर BNS 109 के तहत मुकदमा दर्ज हो
मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
अस्पताल परिसर में पुलिस सुरक्षा बढ़ाई जाए
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो
मेडिकल कॉलेज में बढ़ा तनाव
एक तरफ व्यापारी संगठन और भाजपा नेता कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ डॉक्टरों के प्रदर्शन ने पूरे विवाद को और गरमा दिया है। मेडिकल कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रशासन मामले को शांत कराने में जुटा है, लेकिन दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों पर अड़े हुए हैं। अब सभी की नजर जिला प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी है। क्योंकि यह मामला सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब डॉक्टरों की सुरक्षा बनाम तीमारदारों के अधिकार की बड़ी बहस बन चुका है।
IMA ने कहा — डॉक्टरों का मनोबल नहीं टूटने देंगे
आईएमए जिला अध्यक्ष डॉक्टर आरपी सिंह राजपूत ने साफ कहा कि मेडिकल कॉलेज के छात्रों और डॉक्टरों का मनोबल किसी भी कीमत पर गिरने नहीं दिया जाएगा। संगठन पूरी ताकत के साथ डॉक्टरों के साथ खड़ा है और अन्याय के खिलाफ कदम से कदम मिलाकर लड़ाई लड़ेगा। इसके बाद आईएमए की टीम राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर अरविंद त्रिवेदी के आवास पहुंची, जहां पूरे मामले को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पताल का माहौल और जूनियर डॉक्टरों की मांगों पर भी बात की गई।
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों का मौन धरना शुरू, IMA ने कर दिया समर्थन का ऐलान, तीमारदारों पर ये कार्यवाही करने की मांग
