जालौन में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से तबाही, किसानों के दर्द को लेकर सपा का जोरदार प्रदर्शन

जालौन: अचानक बदले मौसम ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बेमौसम बारिश और तेज ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को इस कदर नुकसान पहुंचाया कि कई किसानों की सालभर की मेहनत पलभर में मिट्टी में मिल गई। गेहूं, सरसों और चना जैसी प्रमुख फसलें बर्बाद होने के बाद अब गांवों में चिंता और निराशा का माहौल साफ देखा जा सकता है।

इसी पीड़ा को आवाज देने के लिए समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरी। जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर, सांसद नारायण दास अहिरवार, पूर्व मंत्री श्रीराम पाल और पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र बजरिया के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए किसानों को तुरंत राहत देने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में साफ कहा गया कि जिले के कई गांवों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और हालात इतने गंभीर हैं कि कुछ किसानों के सामने अब खाने तक का संकट खड़ा हो गया है।

              ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा

सपा नेताओं ने मांग रखी कि सभी प्रभावित किसानों को 100 प्रतिशत फसल मुआवजा दिया जाए। साथ ही, बटाई पर खेती करने वाले किसानों को भी इस राहत का लाभ मिलना चाहिए, क्योंकि वे भी उतने ही नुकसान के शिकार हुए हैं। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के कर्ज और कृषि यंत्रों पर लिए गए ऋण को माफ करने की भी मांग उठाई गई।

नेताओं ने यह भी कहा कि जिन गांवों में खाद्यान्न की कमी हो गई है, वहां कुछ महीनों तक गेहूं और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए। पशुपालकों के लिए भूसे की व्यवस्था, बिजली बिल माफी और खराब मौसम से क्षतिग्रस्त बिजली व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

सपा ने सरकार पर आरोप लगाया कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद इसे अभी तक दैवीय आपदा घोषित नहीं किया गया है और राहत कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। गांवों में आज भी किसान अपने उजड़े खेतों को देख रहे हैं। उनकी आंखों में सिर्फ एक ही सवाल है—क्या उनकी मेहनत की भरपाई कभी हो पाएगी?


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