बुंदेलखंड की धरती पर शनिवार का दिन किसानों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा। दोपहर तक आसमान साफ था, लेकिन अचानक मौसम ने करवट ली और देखते ही देखते तेज ओलावृष्टि शुरू हो गई। बड़े-बड़े ओलों ने खेतों में खड़ी फसलों पर ऐसा कहर बरपाया कि महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बिखर गई।
शाम ढलते-ढलते हालात और बिगड़ गए। रात में करीब 40 मिनट तक मूसलाधार बारिश होती रही। बारिश की तेज धार और ओलों की मार से गेहूं, सरसों और चना की फसलें खेतों में ही गिर गईं। कई जगहों पर तो ओलों की मोटी चादर बिछ गई, जिससे फसलों की बालियां टूटकर जमीन पर बिखर गईं।
किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ देखी जा सकती है। जिन फसलों को काटने की तैयारी चल रही थी, वही अब खेतों में बर्बाद पड़ी हैं। एक किसान की आंखों में आंसू थे, उसने कहा—“बस कुछ दिन और मिल जाते, तो फसल घर आ जाती। अब सब खत्म हो गया।”
यह नुकसान सिर्फ फसलों का नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों का भी है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान अब आर्थिक संकट में फंसते नजर आ रहे हैं। उत्पादन घटने का सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में उनकी परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सर्वे कराया जाए। राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर नुकसान का आकलन करेंगी, ताकि वास्तविक क्षति के आधार पर किसानों को जल्द मुआवजा दिया जा सके।
प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी प्रभावित किसान को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और हर संभव सहायता पहुंचाई जाएगी। लेकिन फिलहाल बुंदेलखंड के किसानों की निगाहें आसमान की ओर नहीं, बल्कि सरकार की मदद पर टिकी हैं।
इस बेमौसम आपदा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसान की जिंदगी कितनी अनिश्चितताओं से भरी है, जहां एक पल की बारिश उसकी पूरी दुनिया बदल सकती है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने बुंदेलखंड में तोड़ी किसानों की कमर, पकी फसलें बर्बाद
