जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिस उम्र में लोग पढ़ाई से दूर हो जाते हैं, उस उम्र में अब गांव के बुजुर्ग स्कूल की चौखट पर पहुंच रहे हैं। हाथ में कॉपी-किताब लेकर दादा-दादी बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यह अनोखी पहल जालौन के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही द्वारा शुरू की गई है। जालौन के ग्राम छानी में कई बुजुर्गों ने स्कूल में प्रवेश लिया है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो आज तक अपना नाम तक नहीं लिख पाते थे। अब वे अक्षर ज्ञान हासिल कर रहे हैं, हस्ताक्षर करना सीख रहे हैं और पहली बार स्कूल के माहौल को करीब से महसूस कर रहे हैं।
गांव के निरीक्षण में सामने आई थी समस्या
जानकारी के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारियों को गांवों के निरीक्षण के दौरान पता चला कि कई बुजुर्ग आज भी निरक्षर हैं। बैंक से जुड़े काम, सरकारी योजनाओं के फॉर्म, जरूरी दस्तावेज और हस्ताक्षर जैसे सामान्य कार्यों में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को देखते हुए “बुजुर्ग शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। अब गांव में ऐसी तस्वीरें देखने को मिल रही हैं, जहां पोता और दादा एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं पोती और दादी भी साथ में अक्षर ज्ञान ले रही हैं।
लोगों ने की पहल की सराहना
जालौन में शुरू हुई यह पहल अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती और अगर प्रशासन चाहे तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल से न सिर्फ बुजुर्गों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि गांवों में शिक्षा के प्रति जागरूकता भी मजबूत होगी। कई लोग अब इस मॉडल को दूसरे जिलों में भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा के जरिए आत्मसम्मान की ओर कदम
ग्रामीण भारत में आज भी बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग मौजूद हैं, जिन्हें कभी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। ऐसे में जालौन की यह पहल सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए सम्मान और आत्मविश्वास लौटाने की कोशिश है, जो जिंदगी भर शिक्षा से दूर रहे। अगर यह प्रयास लगातार जारी रहा, तो आने वाले समय में यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
जालौन में शिक्षा की नई मिसाल: अब दादा-दादी भी जाएंगे स्कूल, SDM रिंकू सिंह राही की पहल बनी चर्चा का विषय
