जालौन: अब वोट मांगन आएं नाशपरे सो हम भगा और दें हेंगे, इत्ते गढ़ई-गढ़ा धरे चुर्खी रोड पे, मोड़ी-मोड़ा गिर परत हेंगे, कल हमई गिर परे ते, इतना कहकर गुस्से से तमतमा गयीं मुन्नी देवी. नगर के प्रमुख इलाकों में शामिल चुरखीवाल से होकर गुजरने वाली चुरखी रोड अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है. सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और बारिश के बाद उनमें जमा पानी राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से सड़क के निर्माण और स्थायी मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ.
चुरखी रोड जालौन के देवनगर चौराहे को चुरखी कस्बे और आसपास के गांवों से जोड़ती है. इस रास्ते का इस्तेमाल रोजाना बड़ी संख्या में छात्र, किसान, ग्रामीण और कारोबारी करते हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क की खराब हालत का असर करीब 20 हजार लोगों की आवाजाही पर पड़ रहा है.
बुंदेलखंड रिपोर्ट ने कई बार उठायी आवाज़
बुंदेलखंड रिपोर्ट ने भी कई बार इस सड़क की समस्या और उपयोगिता के लिए स्थानीय विधायक और अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई. 24 अप्रैल को हमने सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा से प्रश्न किया था लेकिन बात को टाल-मटोल कर दिया गया. फ़िर 2 जुलाई को हमने एक इंटरव्यू में उनसे सवाल पूछा कि आख़िर चुर्खी रोड और लौना रोड कब तक बनेगा तो उनके द्वारा कहा गया कि जैसे ही शासन के द्वारा बजट भेजा जाता है वैसे ही सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा. इस बात का कटाक्ष करते हुए हमने कहा कि चुनाव के लिए मसाला तैयार किया जा रहा है क्या? तो उन्होंने इस बात को हंसकर टाल दिया. हमने न जाने कितने बार इस समस्या को उजागर किया लेकिन हर बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने सब गुड़-गोबर कर दिया.
छात्रों के लिए भी अहम है यह रास्ता
चुरखी रोड के आसपास कई शिक्षण संस्थान हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार करीब दो डिग्री कॉलेज और लगभग दस इंटर कॉलेज की ओर जाने वाले विद्यार्थी इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं. सुबह और दोपहर के समय सड़क पर विद्यार्थियों की आवाजाही बढ़ जाती है. बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल से आने-जाने वाले छात्रों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है.
गांवों से बाजार तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता
चुरखी रोड का इस्तेमाल केवल स्थानीय आवागमन के लिए नहीं होता. आसपास के गांवों से किसान और ग्रामीण जालौन बाजार पहुंचने के लिए भी इसी मार्ग का सहारा लेते हैं. किसानों के लिए खराब सड़क का मतलब सिर्फ असुविधा नहीं है. सामान लेकर आने-जाने वाले वाहनों को गड्ढों के बीच धीमी गति से निकलना पड़ता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है.
पिछले साल मरम्मत के बाद फिर बिगड़ी सड़क?
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले साल क्षेत्रीय विधायक गौरीशंकर वर्मा के क्षेत्र में आने के दौरान सड़क पर मरम्मत का काम कराया गया था. लोगों का दावा है कि कुछ समय बाद सड़क फिर खराब स्थिति में पहुंच गई. हालांकि सड़क पर कराए गए काम की गुणवत्ता, खर्च और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है. ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि पहले मरम्मत हुई थी तो सड़क दोबारा इतनी जल्दी खराब क्यों हुई.
दो साल से सड़क बनने का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दो वर्षों से चुरखी रोड के निर्माण या स्थायी मरम्मत को लेकर उम्मीद जताई जा रही है. इसके बावजूद सड़क की वर्तमान स्थिति में बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा. अब लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग सड़क की तकनीकी जांच कराए और यदि निर्माण या मरम्मत का प्रस्ताव लंबित है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जाए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि सड़क किस विभाग के अधीन है, निर्माण के लिए कितना बजट प्रस्तावित या स्वीकृत है और काम कब तक शुरू किया जाएगा.
लोगों का सीधा सवाल- सड़क आखिर कब बनेगी?
चुरखी रोड से रोज गुजरने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस सड़क की स्थायी समस्या का समाधान कब होगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है. यह आसपास के गांवों को बाजार, छात्रों को शिक्षण संस्थानों और किसानों को मंडी तथा बाजार से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है. अब लोगों की नजर जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों पर है कि चुरखी रोड के गड्ढों से कब तक राहत मिलती है.

