ललितपुर में नकली खाद का खुलासा: इफको की बोरियों में भरा जा रहा था पीडीएम, 217 बोरी बरामद

ललितपुर: जिले के पनारी गांव में बुधवार को प्रशासन और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कथित तौर पर नकली खाद तैयार कर बेचने का मामला सामने आया. सदर उपजिलाधिकारी और कृषि विभाग की टीम ने एक मकान पर छापा मारकर बड़ी मात्रा में खाद बरामद की. मौके पर 217 बोरियों में खाद भरी जा रही थी. कार्रवाई के दौरान तीन युवकों को पकड़ा गया, जबकि कुछ लोग टीम को देखते ही मौके से भाग गए.

ग्राहक बनकर पहुंचा कर्मचारी, फिर टीम ने मारा छापा

जानकारी के मुताबिक, प्रशासन को पनारी गांव में नकली खाद तैयार किए जाने की सूचना मिली थी. इसके बाद कार्रवाई से पहले टीम का एक कर्मचारी ग्राहक बनकर संबंधित मकान तक पहुंचा. जानकारी की पुष्टि होने के बाद बुधवार दोपहर करीब 3 बजे सदर एसडीएम और कृषि विभाग की टीम ने मकान पर छापा मारा. टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद कुछ लोग भाग निकले. हालांकि, तीन युवकों को मौके पर पकड़ लिया गया. मकान से खाद से भरी बोरियों के अलावा बड़ी संख्या में खाली बोरियां और खाद तौलने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा कांटा भी बरामद हुआ.

PDM को डीएपी बताकर बेचने का आरोप

सदर उपजिलाधिकारी हेमंत पटेल के अनुसार, मौके पर पीडीएम खाद को इफको की बोरियों में भरकर डीएपी के नाम पर बेचने की तैयारी की जा रही थी. उन्होंने बताया कि बाजार में पीडीएम की कीमत करीब 450 से 500 रुपये बताई गई है, जबकि किसानों को इसे डीएपी बताकर बेचने का आरोप है. ऐसे में प्रशासन की जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि यह खाद किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे कौन लोग काम कर रहे थे.

50 रुपये मजदूरी पर काम करने पहुंचे थे मजदूर

कार्रवाई के दौरान मिले कुछ मजदूरों ने बताया कि वे 50 रुपये की मजदूरी पर बोरियों में खाद भरने का काम करने आए थे. मौके पर मौजूद एक युवक ने बताया कि वह एक व्यक्ति के लिए काम करता है और मकान किसी पंडित जी से किराए पर लिया गया है. अब पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि मकान वास्तव में किसके नाम है, इसे किराए पर किसने लिया था और नकली खाद तैयार कर किसानों तक पहुंचाने के पीछे मुख्य व्यक्ति कौन है.

शाम 5 बजे तक चलती रही कार्रवाई

प्रशासन की कार्रवाई दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुई, जो शाम 5 बजे तक जारी रही. टीम ने मौके से बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद खाद की वास्तविक मात्रा कितनी है और इस पूरे कारोबार में कितने लोग शामिल हैं. किसानों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि यदि किसी खाद को दूसरी खाद के नाम पर बेचा जाता है तो इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है.

About बुंदेलखंड रिपोर्ट ब्यूरो

View all posts by बुंदेलखंड रिपोर्ट ब्यूरो →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *