निवाड़ी: जिला से गैस संकट की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों में जहां पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, वहीं जमीनी स्तर पर आम लोग गैस सिलेंडर के लिए भटकने को मजबूर हैं। यह विरोधाभास अब खुलकर सामने आने लगा है।
कंधे पर सिलेंडर रखकर पहुंचा कलेक्ट्रेट
ओरछा के आजादपुरा निवासी सुनील राजपूत ने अपनी समस्या को लेकर ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वह खाली गैस सिलेंडर कंधे पर उठाकर साप्ताहिक जनसुनवाई में कलेक्टर कार्यालय तक पैदल पहुंचे। करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी परेशानी रखी। सुनील का कहना है कि कई दिनों से उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने एजेंसियों के कई चक्कर लगाए, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। आखिरकार मजबूर होकर उन्होंने इस अनोखे तरीके से अपनी आवाज उठाई, ताकि जिम्मेदार अधिकारी वास्तविक स्थिति को समझ सकें।
प्रशासन के दावे और हकीकत में फर्क
घटना के दौरान मौजूद अधिकारियों ने एक बार फिर यही कहा कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध है। हालांकि, स्थानीय लोगों की स्थिति इस दावे से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। लोग सिलेंडर के लिए लाइन में लग रहे हैं, एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं और फिर भी उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की परेशानी तक सीमित नहीं है। यह पूरे इलाके में फैली उस समस्या की ओर इशारा करता है, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही है। प्रशासनिक आंकड़ों और जमीनी सच्चाई के बीच का यह अंतर अब खुलकर सामने आ चुका है।
समाधान की जरूरत
निवाड़ी जिले में सामने आई यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी की तरह है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह असंतोष और बढ़ सकता है। जरूरत इस बात की है कि अधिकारी केवल कागजी दावों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
ख़ाली सिलेंडर कंधे पर रखकर कलेक्ट्रेट पहुंचा युवक, फ़िर जो हुआ…
