पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत बोले- “प्रांत या प्राण, अब आर-पार की लड़ाई”

महोबा: अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। महोबा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सांसद एवं भाजपा नेता गंगा चरण राजपूत ने अलग बुंदेलखंड राज्य के गठन को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, रोजगार, जल संकट और पलायन से जुड़ा जनहित का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बुंदेलखंड को लेकर किए गए वादे की याद दिलाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस दिशा में ठोस निर्णय लिया जाए।

“प्रांत या प्राण” के नारे के साथ संघर्ष का ऐलान
गंगा चरण राजपूत ने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों ने वर्षों से अलग राज्य की मांग उठाई है। उन्होंने “प्रांत या प्राण” का नारा देते हुए कहा कि क्षेत्र के अधिकारों की लड़ाई अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन के लिए हर स्तर का संघर्ष किया जाएगा और किसी भी प्रकार के दबाव से पीछे नहीं हटेंगे।

जल जीवन मिशन पर उठाए सवाल
पूर्व सांसद ने जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि महोबा जिले में बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद लोगों को आज भी पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त कर दी गईं, जिससे आम लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर उनके पुत्र एवं क्षेत्रीय विधायक ब्रजभूषण राजपूत भी लगातार आवाज उठाते रहे हैं।

अवैध खनन और पर्यावरण को लेकर चिंता
गंगा चरण राजपूत ने बुंदेलखंड में अवैध खनन को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया जा रहा है। उनके अनुसार भारी मशीनों के माध्यम से खनन होने से नदियों, पहाड़ों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों के कारण क्षेत्र के संसाधनों का व्यापक नुकसान हुआ है।

पलायन और बेरोजगारी को बताया बड़ी चुनौती
पूर्व सांसद ने कहा कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवा और मजदूर दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उनका दावा था कि बुंदेलखंड के अनेक परिवार आज भी आजीविका के लिए अपने घरों से दूर रहने को विवश हैं। उनका मानना है कि अलग राज्य बनने से स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।

2014 के वादे का दिलाया स्मरण
गंगा चरण राजपूत ने कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार ने अपने अन्य प्रमुख चुनावी वादों को पूरा किया, उसी तरह बुंदेलखंड राज्य के गठन के मुद्दे पर भी सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अलग राज्य की मांग पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

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