इंस्पेक्टर अरुण के उस सुसाइड नोट में क्या लिखा? पैसों के लेन-देन की हो रही बात

जालौन:  इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस मामले में 383 पेज की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इंस्पेक्टर की हत्या साजिश के तहत की गई और इसमें सिपाही मीनाक्षी की भूमिका सामने आई है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर के सिर के ऊपरी हिस्से में गहरा घाव और गोली का निशान मिला था, जिससे हत्या की आशंका और मजबूत हो गई। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि घटना आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या हो सकती है।

5 दिसंबर 2025 को हुई थी घटना
पुलिस जांच के अनुसार, यह वारदात 5 दिसंबर 2025 को हुई थी। चार्जशीट में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया गया है कि घटना के समय सिपाही मीनाक्षी इंस्पेक्टर के पास मौजूद थी।
इसके अलावा जांच के दौरान आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज भी जुटाए गए हैं, जिनसे घटना की कड़ियों को जोड़ने में पुलिस को मदद मिली है।

38 गवाहों के बयान और कॉल रिकॉर्ड शामिल
पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में कुल 38 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही इंस्पेक्टर और संबंधित कांस्टेबल के बीच हुई बातचीत की कॉल डिटेल भी जांच का अहम हिस्सा बनाई गई है। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम को क्रमबद्ध तरीके से समझने की कोशिश की गई है।

जांच में मिला सुसाइड नोट
मामले की जांच के दौरान पुलिस को इंस्पेक्टर अरुण कुमार राय का एक कथित सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में आर्थिक विवाद और मानसिक तनाव का जिक्र किया गया है। हालांकि यह नोट इंस्पेक्टर की मौत से करीब आठ दिन पहले यानी 27 नवंबर 2025 का बताया जा रहा है। इसी वजह से जांच एजेंसियां इस सुसाइड नोट को लेकर भी सावधानी से जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा सुसाइड नोट लिखने के आठ दिन बाद आत्महत्या करना कई सवाल खड़े करता है। इसलिए इस नोट की लिखावट का मिलान कराने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

                          कथित सुसाइड नोट

सुसाइड नोट में क्या लिखा था?
कथित सुसाइड नोट में लिखा गया है कि इंस्पेक्टर ने अपने साले और कुछ परिचितों से पैसा लेकर महराजगंज निवासी शिव भूषण चौबे उर्फ चंचल चौबे को दिया था। आरोप है कि उसने मकान आवंटन और प्रॉपर्टी में निवेश कराने का भरोसा दिलाया था। नोट में यह भी लिखा गया है कि बाद में वह पैसा वापस नहीं कर रहा था और लगातार टालमटोल कर रहा था। इसी वजह से इंस्पेक्टर मानसिक रूप से परेशान थे और लोग उनसे पैसे की मांग कर रहे थे। नोट के अंत में लिखा है कि चंचल चौबे की प्रताड़ना से परेशान होकर वह आत्महत्या कर रहे हैं और इसके लिए उसी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नोट के नीचे प्रार्थना पत्र के प्रारूप में इंस्पेक्टर का नाम, थाना कुठौंद, जालौन और दिनांक 27 नवंबर 2025 दर्ज बताया गया है।

पुलिस की आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की सत्यता और लिखावट की पुष्टि के लिए फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही चार्जशीट में शामिल साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आगे की सुनवाई होगी। इस मामले ने जालौन पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है और पूरे घटनाक्रम पर लोगों की नजर बनी हुई है।

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