जालौन: मोहल्ला बालमभट्ट निवासी एक दुकानदार हरिश्चंद्र गुप्ता विगत कई महीनों से बिजली विभाग द्वारा थमाए जा रहे गलत और अतार्किक बिलों से परेशान हैं. उनकी दुकान, जो लगभग चार महीनों से बंद पड़ी है और जहाँ बिजली का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं हो रहा, उसका उन्हें करीब 20,000 रुपए का बिजली बिल भेजा गया है. इस पूरे प्रकरण ने बिजली विभाग में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खोल कर रख दी है.
बिल और रीडिंग में जमीन-आसमान का अंतर
हरिश्चंद्र गुप्ता के पास मंसब खान साइकिल वालों के सामने मोहल्ला बालमभट्ट में स्थित एक दुकान है, जिसका वैध बिजली कनेक्शन (कनेक्शन नंबर: 9386328908) है. उन्होंने अप्रैल 2025 तक के सभी बिलों का भुगतान कर दिया था. उनके अनुसार, 22 मई, 2025 को दुकान के मीटर की रीडिंग 1047 थी और इस आधार पर उन्हें 647 रुपए का एक बिल दिया गया. इसके बाद से ही दुकान पूरी तरह बंद है.
हालाँकि, आश्चर्यजनक रूप से 14 जून, 2025 को जारी अगले बिल में प्रीवियस मीटर रीडिंग 1047 दिखाई गई और प्रेजेंट रीडिंग 1843 दर्शाई गई जबकि 16 जून को मीटर में चेक करने पर उसकी रीडिंग 1048 थी यानि बीते एक महीने में सिर्फ एक यूनिट बिजली खर्च हुई. इसका वीडियो भी उनके पास मौजूद है पर इसके लिए उन्हें 8,122 रुपए की मोटी रकम का बिल थमा दिया गया. यहीं से दिन ब दिन उनका बिजली बिल बढ़ता ही जा रहा है. इसके बाद के बिल तो और भी चौंकाने वाले हैं. 17 जुलाई, 2025 को आए बिल में प्रीवियस और प्रेजेंट रीडिंग दोनों 1843 दिखाई गई, लेकिन बिल 10,800 रुपए का था. फिर 13 अगस्त, 2025 को प्रीवियस और प्रेजेंट रीडिंग दोनों बिल में 2137 दर्शाई गईं और बिल 13,476 रुपए का आया. इसके 15 दिन बाद 28 अगस्त 2015 को 15266.32 रुपए का बिल भुगतान करने के लिए मैसेज मिला लेकिन इसका कोई बिल भी प्राप्त नहीं हुआ. ध्यान देने वाली बात ये है कि इस अगले भुगतान का बिल 15 दिन में ही जारी कर दिया गया. इसके बाद 4 सितंबर 2025 को जो बिल मिला उसमें प्रीवियस और प्रेजेंट रीडिंग 2431 दर्शाई गई जो कुल 18116 रुपए का बिल था. इसके बाद 20 दिन बाद ही 25 सितंबर 2025 को बिल जमा करने का जो मैसेज फोन पर प्राप्त हुआ उसमें ये रकम बढ़कर अब 19,594 रुपए हो चुकी है.

शिकायतों के बावजूद नहीं मिल रहा निवारण
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हरिश्चंद्र गुप्ता ने विभाग के समक्ष कई बार औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन किसी का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला. 17 जून, 2025 और 26 जून, 2025 को उन्होंने विद्युत विभाग, जालौन को प्रार्थना पत्र दिया जो विभागीय अधिकारियों द्वारा रख लिए गए और उनकी रिसीविंग मांगने पर भी कोई रिसीविंग नहीं दी गई, जो साफ तौर पर विभाग के लोगों की गलत मानसिकता को दिखाता है. इसके बाद 9 जुलाई, 2025 को विभाग द्वारा आयोजित एक विद्युत कैंप में भी उन्होंने यह मामला उठाया. इस पर कैंप में मौजूद एसडीओ राम सुधार व अन्य अधिकारियों ने उन्हें मामला सुलझाने का आश्वासन दिया और कहा कि आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है. इसकी शिकायत संख्या 19072506056 उन्हें मोबाइल पर भी भेजी गई. पर इस सबके बावजूद न तो उनका बिल अब तक संशोधित किया गया और न ही संबंधित मीटर रीडर के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई.
हरिश्चंद गुप्ता का कहना है कि यह मामला मीटर रीडर की सरासर लापरवाही से कहीं आगे जाकर पूरे विभाग की मिलीभगत को दर्शाता है। उनका कहना है कि समय से बिल भरने के बावजूद इस तरह की व्यवस्था से उन्हें मानसिक रूप प्रताड़ित किया जा रहा है. बता दें इसके बाद उन्होंने एक बार फिर 26 अगस्त 2025 को पूरा प्रकरण लिखकर एक शिकायती पत्र विद्युत विभाग, जालौन को दिया. बकौल हरिश्चंद्र गुप्ता इस पत्र की रिसीविंग लेने के लिए उन्हें विभागीय अधिकारी से बहुत बहस करनी पड़ी ताकि शिकायत पत्र का वो रिकॉर्ड अपने पास रख सकें. हालांकि उन्हें पत्र पर रिसीविंग तो मिल गई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका.
हरिश्चंद्र गुप्ता जैसे सैकड़ों उपभोक्ताओं की यह पीड़ा केवल एक गलत बिल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सिस्टमैटिक समस्या का संकेत है जहाँ समय से बिजली बिल जमा करने वाला आम नागरिक और उपभोक्ता कोई राहत नहीं पा रहा है. इस मामले ने एक बार फिर बिजली विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता की गंभीर कमी को उजागर करके रख दिया है.

