ऑफिस में महिला ट्रेनी से फेसिअल करवा रहा आरसेटी का डायरेक्टर. लगे कई गंभीर आरोप

इंडियन बैंक में RSETI का अर्थ है ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (Rural Self Employment Training Institute). यह एक ऐसा संस्थान है जो ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण देता है और उन्हें उद्यमिता अपनाने में मदद करता है. यहाँ के डायरेक्टर के ख़िलाफ़ महिला ट्रेनी व अन्य स्वयं सहायता समूह के लोगों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देते हुए भ्रष्टाचार एवं परिवारवाद समेत कई अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि डायरेक्टर पिछले तीन सालों से कुंडली मारे बैठा है. वो कहता है कि मुझे यहां से कोई नहीं हटा सकता है.

भतीजे को बना दिया कैंटीन का ठेकेदार. फ़र्जी तरीक़े से करवाता है भुगतान
डायरेक्टर ने अपने भतीजे आशीष त्रिवेदी को कैंटीन का ठेकेदार बना दिया है. जबकि भुगतान फ़र्जी तरीक़े से डरा धमकाकर भुगतान करवाता है. जब कोई व्यक्ति इसकी शिकायत करता है तो वह कहता है कि मेरा दामाद अधिकारी है मुझे यहां से कोई नहीं निकाल सकता. इसके साथ ही वह बैंक को गुमराह करने का काम कर रहा है.

लड़कियों के साथ करता है डांस, लगवाता है फेसिअल
शैक्षणिक भ्रमण के नाम पर वह प्रशिक्षण लेने वाले लोगों को पर्यटन स्थल पर ले जाता है जहां उसका स्वार्थ सिद्ध होता है. इसके साथ ही वह इतने जिम्मेदार पद पर रहते हुए लड़कियों के साथ नाच-गाना आदि कार्य करता है जो कि नियमों के विरुद्ध है. इसके साथ ही ट्रेनी से अपने ऑफिस में फेसिअल करवाता है जो फ़ोटो दी गयी है. उन्होंने आगे कहा कि डायरेक्टर ने अपने अनाधिकृत आवास पर कैमरा नहीं लगवाया है, ऐसे में क्या लड़कियों और महिलाओं को डायरेक्टर के कमरे में जाना उचित है? ऐसे में इन सब चीज़ों की वज़ह से जो बैंक का उद्देश्य है वो पूरा नहीं हो पा रहा है जिससे बैंक को वित्तीय नुकसान हो रहा है. इसके साथ ही वह शैक्षणिक भ्रमण के नाम अवैध रूप से ट्रेनी से धन उगाही का कार्य करता है. ट्रेनी से प्रशिक्षण के नाम पर 250 रुपये और सेटलमेंट करने के लिए फ़र्जी तरीक़े से 100 रुपये लिए जाते हैं जिससे बैनर छपते है और MIS में फ़ोटो से सत्यापित किया जाता है. 

फैकल्टी को प्रताणित कर मज़बूरन त्यागपत्र देने को मजबूर किया
लेटर में आरोप है कि डायरेक्टर ने अपने सगे भांजे को फैकल्टी के रूप में नियुक्त किया है जो कि साफ़-साफ़ परिवारवाद दिख रहा है. उसने पूर्व फैकल्टी को इतना मानसिक रूप से प्रताणित किया कि वह त्यागपत्र देने को मजबूर हो गया है और इसने अपने भांजे को फैकल्टी के रूप में रख लिया है. इसके साथ ही वहीं उनका स्थायी आवास बन गया है. खाना-पीना आदि चीजें सब वहीं होती है जो कि नियमों के विरुद्ध हैं. ये सब चीजें CCTV में रिकॉर्ड हैं. 

लोन दिलाने के नाम पर ग़रीब मज़दूरों को फँसाता है
गांव के भोले भाले गरीब मजदूरों को लोन दिलाने के नाम पर झूठ बोलकर प्रशिक्षण करवाता है. उनके ऑफिस के कर्मचारी उन मजदूरों से जबरदस्ती फ़ोटो भेजने को कहते हैं. जबकि ऐसा कोई लोन पास होता ही नहीं. 

प्रार्थना पत्र में और भी बहुत सारी बातें लिखी है जो मेंशन है आप पढ़ सकते हैं. उन्होंने डीएम से गुहार लगाते हुए कहा कि आरोपी के विरुद्ध जल्द से जल्द कार्यवाही की जाएं नहीं तो वह सबूतों को मिटा सकता है. 

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