बुंदेलखंड की भंड़ैती:वो पुराना हास्य-व्यंग्य नाट्य जो अब हो रहा गायब
तुलसीदास ने दोहावली में लिखा है – “चोर चतुर बटपार नट, प्रभुप्रिय भंडुआ भंड”। केशवदास की रामचन्द्रिका में भी आता है – “कहूँ भांड़ भांड़यो करै मान पावैं। कहूँ लोलिनी बेड़िनी गीत गावैं।” इससे साफ है कि 17वीं सदी के शुरू में भांड़ों को काफी सम्मान मिलता था।
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