जालौन: भ्रष्टाचार निवारण संगठन की विस्तृत जांच में कदौरा थाने में तैनात रहे सिपाही राजकिशोर भदौरिया पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है. जांच में पाया गया कि उन्होंने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी. आरोप सही पाए जाने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है, जबकि अब यह मामला लखनऊ मुख्यालय को भेजा गया है ताकि आगे की जांच वहीं से हो सके.
यह पूरा मामला तब सामने आया जब कालपी के निवासी वीरेंद्र यादव ने झांसी स्थित भ्रष्टाचार निवारण संगठन में एक लिखित शिकायत दी. शिकायत में कहा गया कि कानपुर निवासी राजकिशोर भदौरिया, जो कुछ समय पहले कदौरा थाने में सिपाही के पद पर तैनात थे, सेवा के दौरान अवैध तरीके से संपत्ति बनाई है. इस शिकायत को गंभीर मानते हुए झांसी इकाई के प्रभारी सादाब खान के नेतृत्व में जांच शुरू की गई, जो लगभग पांच वर्षों तक चली.
जांच के दौरान संगठन ने राजकिशोर भदौरिया की आय और संपत्तियों का मिलान किया. रिपोर्ट के अनुसार, उनके पास कुल 64 लाख 85 हजार 801 रुपए की वैध आय थी, जबकि जांच में 97 लाख 41 हजार 524 रुपए की संपत्ति और खर्च के प्रमाण मिले. यह उनकी वास्तविक आय से करीब 32 लाख 55 हजार रुपए अधिक था. इतने बड़े अंतर पर वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.
साक्ष्यों के आधार पर झांसी इकाई ने कदौरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है. आगे की कार्रवाई अब लखनऊ मुख्यालय के अधिकारियों के अधीन की जाएगी. थानाध्यक्ष प्रभात सिंह के अनुसार, यह मामला वर्ष 2020 से जांच में था और रिपोर्ट पूरी होने के बाद सिपाही को दोषी पाया गया.
संगठन के अधिकारियों ने यह भी बताया है कि जांच के दौरान अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए हैं. फिलहाल उनकी फाइलें समीक्षा में हैं, और यदि किसी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो अगली कार्रवाई की जाएगी.
स्थानीय प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में चर्चा को जन्म दे दिया है. ग्रामीणों ने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह एक सराहनीय कदम है. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी जांचें केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रहें, बल्कि उन सभी पर की जाएं जिनकी संपत्ति उनकी आमदनी से मेल नहीं खाती.
जालौन में तैनात रहे सिपाही पर गिरी गाज़. आय से अधिक संपत्ति का मामला
