दतिया: बुंदेलखंड के दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है. चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने के आरोपों पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. शुक्रवार को जस्टिस अमित सेठ की बेंच में मामले की सुनवाई हुई.
विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने वाली यह याचिका भाजपा नेता एवं अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने दायर की है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में पुराने आपराधिक मामलों का पूरा विवरण नहीं दिया गया था. हालांकि, इन आरोपों पर विधायक का पक्ष और न्यायालय का अंतिम निर्णय अभी सामने आना बाकी है.
1991 के मामलों की जानकारी नहीं देने का आरोप
याचिका में वर्ष 1991 की एक घटना का उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता के मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम हुआ था. इस दौरान दर्ज एफआईआर में करीब 22 लोगों के नाम शामिल होने का दावा किया गया है, जिनमें घनश्याम सिंह का नाम भी होने की बात कही गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि संबंधित मामले में अदालत में चालान पेश किया जा चुका था, लेकिन जुलाई 2026 के उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे में इसकी जानकारी नहीं दी गई. याचिका में वर्ष 1991 के दो कथित आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है. वहीं, उपलब्ध विवरण के अनुसार, उपचुनाव के दौरान घनश्याम सिंह ने अपने हलफनामे में दो लंबित आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था. ऐसे में अदालत के सामने यह सवाल है कि जिन मामलों का जिक्र याचिका में किया गया है, उनकी जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य था या नहीं.
2020 के मामले को लेकर भी उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2020 में दर्ज एक अन्य आपराधिक मामले का भी हवाला दिया है. आरोप है कि इस मामले का विवरण घनश्याम सिंह ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में नहीं दिया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने विधायक को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है. अब आगे की सुनवाई में याचिका में लगाए गए आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और विधायक के पक्ष पर विचार किया जाएगा.
जबलपुर से ग्वालियर बेंच पहुंचा मामला
घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पहले जबलपुर हाईकोर्ट में दायर की गई थी. बाद में इसे सुनवाई के लिए ग्वालियर बेंच में स्थानांतरित कर दिया गया. अब इसी बेंच में मामले की कार्यवाही आगे बढ़ रही है. गौरतलब है कि अदालत की ओर से नोटिस जारी होना आरोपों की पुष्टि या निर्वाचन रद्द होने का फैसला नहीं है. फिलहाल, मामले में विधायक का जवाब और न्यायालय का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा.
6,016 वोटों से जीते थे घनश्याम सिंह
दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराया था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई को मतदान हुआ था और 3 अगस्त को परिणाम घोषित किए गए थे. अब इस निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी. अदालत को यह तय करना होगा कि चुनावी हलफनामे में कथित रूप से जानकारी नहीं देने का आरोप कितना तथ्यात्मक है और उसका निर्वाचन की वैधता पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ता है या नहीं. फिलहाल, हाईकोर्ट में याचिका लंबित होने और नोटिस जारी किए जाने से घनश्याम सिंह की विधायक पद की सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं हुई है.
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