झांसी: रेलवे डिवीजन में ट्रेनों की सुरक्षा को लेकर बड़ा तकनीकी बदलाव किया जा रहा है। डिवीजन में ‘कवच’ नामक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे ट्रेन हादसों की आशंका लगभग समाप्त हो जाएगी।
डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) अनिरुद्ध कुमार के अनुसार, ‘कवच’ प्रणाली रेलवे संचालन में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। यह सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर आधारित है, जो ट्रेनों की लोकेशन और गति पर लगातार नजर रखता है।
कैसे काम करता है ‘कवच’ सिस्टम?
कवच तकनीक के तहत रेलवे ट्रैक पर विशेष टॉवर लगाए जाते हैं और ट्रेन के इंजन पर एक स्मार्ट डिवाइस फिट की जाती है। यह डिवाइस लगातार यह मॉनिटर करती है कि ट्रेन कहां है और कितनी गति से चल रही है। इसी तरह, सामने से आने वाली ट्रेन भी इसी तकनीक से जुड़ी होती है। जैसे ही दोनों ट्रेनों के कोऑर्डिनेट एक ही ट्रैक पर आने का संकेत देते हैं, सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है और ऑटोमैटिक ब्रेक लगा देता है।
25 किलोमीटर पहले से शुरू होती है निगरानी
कवच प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि यह लगभग 25 किलोमीटर की दूरी से ही ट्रैकिंग शुरू कर देती है। यदि किसी कारण से दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आ जाती हैं, तो 3 से 4 किलोमीटर पहले ही दोनों ट्रेनों में स्वतः ब्रेक लग जाते हैं। इससे किसी भी संभावित टक्कर को टाल दिया जाता है।
झांसी डिवीजन में कहां तक पहुंचा काम?
डीआरएम ने जानकारी दी कि झांसी डिवीजन में मुरैना तक कवच सिस्टम लगाने का काम पूरा हो चुका है। इसके आगे का कार्य प्रगति पर है और इसे मार्च 2027 तक बीना तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आगे की योजना
रेलवे प्रशासन ने कवच सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है। पहले चरण के बाद दूसरे चरण में कानपुर रूट और फिर मानिकपुर ट्रैक पर इस तकनीक को लागू किया जाएगा।
“कवच” कैसे ट्रेनों को आपस में टकराने से रोकेगा? 3KM पहले ही लग जाएंगे ऑटोमैटिक ब्रेक
