न्यायपालिका पर टिप्पणी पड़ी भारी, NCERT ने वापस मंगाई 8वीं की किताबें

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक को बाजार से वापस मंगाने का फैसला किया है। यह पुस्तक बीते सोमवार को एनसीईआरटी काउंटर से बेची गई थी, लेकिन मंगलवार और बुधवार के बीच खरीदारों से संपर्क कर इसे लौटाने को कहा गया। कर्मचारियों के मुताबिक, पुस्तक में “एक समस्या” बताकर इसे वापस मंगाया गया है।

एनसीईआरटी काउंटर पर कार्यरत एक कर्मचारी ने बुधवार को बताया कि प्रकाशन विभाग के एक अधिकारी ने निर्देश दिया था कि जिन लोगों ने सोमवार को यह पुस्तक खरीदी है, उनसे संपर्क कर प्रतियां वापस ली जाएं। कर्मचारी के मुताबिक, सोमवार को कुल 38 प्रतियां बेची गई थीं, जिनमें से 16 प्रतियां अब तक वापस आ चुकी हैं। तीन मामलों में खरीदारों का संपर्क नंबर उपलब्ध नहीं था, इसलिए UPI पहचान संख्या के आधार पर बैंक से विवरण मांगा गया। कर्मचारी ने यह भी कहा कि मंत्रालय की ओर से पुस्तक वापस लेने का आदेश दिया गया है।

एनसीईआरटी के निदेशक डी पी सकलानी ने इस विषय पर प्रतिक्रिया के लिए किए गए फोन कॉल और संदेश का जवाब नहीं दिया। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मंगलवार को इस पुस्तक की कोई प्रति नहीं बेची गई।

गौरतलब है कि यह विवाद उस अध्याय को लेकर सामने आया है जिसका शीर्षक “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” है। यह अध्याय पुस्तक “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, भाग 2” में शामिल था। इस अध्याय में न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों का उल्लेख किया गया था, जिसमें मामलों का भारी लंबित बोझ और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं का जिक्र था।

इस विषय पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बीते बुधवार को कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि वे किसी को भी न्यायपालिका की गरिमा से खिलवाड़ करने या संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। न्यायपालिका से संबंधित सामग्री को लेकर उठे विवाद के बाद एनसीईआरटी ने पुस्तक की बिक्री रोक दी है और पहले से खरीदी गई प्रतियों को वापस मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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