इन गांवों तक नहीं हो पा रही जलापूर्ति, हर घर तक पानी का सपना अधूरा क्यों? डीएम ने फटकारा

जालौन: जल ही जीवन है, लेकिन जब महीनों तक नल सूखे रहें, तो यही जीवन सबसे बड़ी पीड़ा बन जाता है. जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित हर घर जल योजना की सुस्त प्रगति ने जनपद के सैकड़ों गांवों के लोगों को इसी पीड़ा से रूबरू करा दिया है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अब कड़ा रुख अपनाया है. 

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी की आवाज में साफ झलक रहा था कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पेयजल आपूर्ति से जुड़े कार्य केवल सरकारी फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर दिखने चाहिए. आमजन को शुद्ध और निर्बाध पेयजल मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. 
बैठक में सामने आया कि योजना के तहत लगभग 1600 किलोमीटर सड़कों की खुदाई की गई, लेकिन अभी भी 264 ग्राम पंचायतों में करीब 330 किलोमीटर सड़कें अधूरी पड़ी हैं. टूटी सड़कें, धूल और कीचड़ से गुजरते ग्रामीणों की परेशानी ने प्रशासन को झकझोर दिया. जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं जीवीपीआर और बीजीसीसी को सख्त निर्देश देते हुए 31 जनवरी तक हर हाल में सड़क पुनर्निर्माण पूरा करने का आदेश दिया. 

सबसे चिंताजनक स्थिति उन गांवों की है, जहां पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से चार माह से पानी नहीं पहुंचा है. कुरकुरू, करथरा, गुढ़ा, सिमरिया, टीहर, धन्जा और गिरथान जैसे गांवों में महिलाएं और बच्चे आज भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं. जिलाधिकारी ने इन गांवों में जनवरी के भीतर जलापूर्ति बहाल करने के स्पष्ट निर्देश दिए. उन्होंने भविष्य की गलतियों को रोकने के लिए निर्माण प्राक्कलन में पाइपलाइन शिफ्टिंग को अनिवार्य करने और खुदाई से पहले विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने के निर्देश भी दिए. विद्युत आपूर्ति में बाधा पर नाराजगी जताते हुए कोटा मुस्तकिल पेयजल योजना को स्वतंत्र फीडर से जोड़ने का आदेश दिया गया. 

यह बैठक केवल समीक्षा नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों की उम्मीद की आवाज थी, जिनके लिए हर घर जल योजना सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सम्मान और जीवन का सवाल है. 

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