झांसी: मोठ तहसील क्षेत्र के ग्राम खजूरी से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक गरीब विधवा महिला ने आवास योजना के अंतर्गत मिलने वाली धनराशि में रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है. पीड़िता रामरती जाटव पत्नी पूरन, (निवासी ग्राम खजूरी) ने मोंठ उपजिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है.
प्रार्थना पत्र में रामरती ने बताया कि वह अनुसूचित जाति की गरीब विधवा महिला हैं और आवास के अभाव में उन्होंने विधवा आवास योजना के तहत आवेदन किया था. आरोप है कि आवास स्वीकृति के लिए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव उमाशंकर ने उनसे 30 हजार रुपये की अवैध मांग की. मजबूरी में प्रार्थिया ने उधार लेकर यह रकम दोनों को दे दी.
रामरती के अनुसार, इसके बाद उनके खाते में आवास निर्माण के लिए 40 हजार रुपये और 70 हजार रुपये की किश्त आई, जिससे उन्होंने अपना मकान बनवाया. लेकिन जब बकाया 10 हजार रुपये की किश्त और मजदूरी के 20 हजार रुपये दिलाने की मांग ग्राम प्रधान से की गई तो उनसे पुनः 5 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई. पीड़िता का कहना है कि वह अत्यंत गरीब है और रिश्वत देने में असमर्थ है.
पीड़िता ने आरोप लगाया कि बार-बार कहने के बावजूद न तो बकाया राशि उनके खाते में डाली जा रही है और न ही मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस संबंध में रामरती ने उपजिलाधिकारी मोठ से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बकाया 10 हजार रुपये की किश्त और 20 हजार रुपये की मजदूरी शीघ्र दिलाई जाए तथा ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए.
मोंठ एसडीएम अवनीश तिवारी ने बताया कि “महिला की शिकायत प्राप्त हुई है. खंड विकास अधिकारी मोंठ को जांच के लिए निर्देशित किया गया है.” खंड विकास अधिकारी राकेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि महिला का आवास स्वीकृत नहीं है. फिर भी आरोपों की जांच कराई जा रही है, जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी.
आवास के नाम पर सचिव और प्रधान ने विधवा महिला से ऐंठे 30 हज़ार रुपये, अब 5 हज़ार की डिमांड
