केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने का बड़ा निर्णय लिया है. सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम का परिवर्तन नहीं बल्कि कार्यालय की मूल भावना और कार्यशैली को दर्शाने वाली नई पहचान है. आधिकारिक बयान के अनुसार, नया नाम देश के जनसेवा मॉडल को और स्पष्ट करता है तथा आम नागरिकों के लिए सरकार की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
जनसेवा की भावना को मजबूत करने की पहल
सरकार ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ नाम भारतीय परंपरा में सेवा, समर्पण और कर्तव्य के मूल मंत्र से प्रेरित है. प्रधानमंत्री कार्यालय लंबे समय से जनसुनवाई, शिकायत निस्तारण, विकास योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक समन्वय का केंद्र रहा है. इसलिए इसे ‘सेवा का पवित्र स्थान’ यानी ‘सेवा तीर्थ’ की संकल्पना से जोड़ा गया है.
सरलीकरण और पारदर्शिता पर जोर
अधिकारियों का कहना है कि इस परिवर्तन का उद्देश्य कार्यालय की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाना है. नए ढांचे में नागरिकों की शिकायतों, सुझावों और जनहित से जुड़े कार्यों को डिजिटल तरीके से अधिक तेजी से निपटाने की व्यवस्था की जाएगी. साथ ही ‘सेवा तीर्थ पोर्टल’ लॉन्च करने की भी तैयारी है, जिसके जरिए आम लोग सीधे विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों की स्थिति देख सकेंगे.
राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व
विशेषज्ञ इसे सरकार की उस रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक संस्थानों को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़कर नया संदेश देने की कोशिश की जा रही है. ‘सेवा तीर्थ’ नाम जनता में एक सकारात्मक और सेवा-प्रधान छवि स्थापित करने में मदद करेगा.
PMO का नाम बदलकर हो गया “सेवा तीर्थ”, ये है वज़ह
