भारत में तंबाकू और गुटखे का सेवन एक आम लत बन चुकी है. कई लोग दिनभर गुटखा खाने के बाद रात को सोते समय भी इसे मुंह में रख लेते हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से यह आदत शरीर के लिए बेहद हानिकारक है क्योंकि यह रासायनिक, शारीरिक और कोशिकीय स्तर पर नुकसान पहुंचाती है.
गुटखे में निकोटिन, चुना (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) और तंबाकू के साथ अनेक रासायनिक तत्व पाए जाते हैं. जब व्यक्ति इसे मुंह में रखकर सो जाता है, तो ये तत्व घंटों तक मसूड़ों, गालों और जीभ की कोशिकाओं के संपर्क में रहते हैं. वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, निकोटिन सीधे डीएनए को क्षति पहुंचाता है और कोशिका विभाजन में परिवर्तन करता है. यही कारण है कि ऐसे लोगों में ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
रात के समय शरीर की लार ग्रंथियां धीमी गति से काम करती हैं. इससे मुंह में मौजूद टॉक्सिक केमिकल्स बाहर नहीं निकल पाते और वे लगातार श्लेष्मा झिल्ली को जलाते रहते हैं. कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड और सुपारी का संयोजन म्यूकोसा ऊतकों में अल्सर और फाइब्रोसिस उत्पन्न करता है, जिससे व्यक्ति का मुंह धीरे-धीरे सख्त हो जाता है — जिसे चिकित्सा विज्ञान में ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहा जाता है. यह कैंसर का शुरुआती चरण होता है.
इसके अलावा, गुटखा में पाया जाने वाला निकोटिन रक्तचाप और हृदय गति को असामान्य रूप से बढ़ा देता है, जिससे नींद के दौरान दम घुटने या हृदयाघात की संभावना भी रहती है. वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि लंबे समय तक तंबाकू के संपर्क में रहने वाले लोगों में लिवर एंजाइम्स की सक्रियता बढ़ जाती है, जो शरीर के डिटॉक्स सिस्टम को कमजोर कर देती है.
इसलिए, वैज्ञानिक तर्क यही कहते हैं कि रात को मुंह में गुटखा रखकर सोना आत्मघाती कदम है। इसे तुरंत छोड़ना ही एकमात्र समाधान है.
रात को मुंह में गुटखा दबाकर सोते हैं तो ख़ुद दे रहें हैं अपनी मौ*त को न्यौता, पढ़िए कैसे
