जालौन: सुशासन सप्ताह के अंतर्गत “प्रशासन गांव की ओर” पहल के तहत जल संचयन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पब्लिक स्कूल में एक पानी की पाठशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मिशन निदेशक, नेशनल वाटर मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार अर्चना वर्मा, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर “पानी की पाठशाला” का आयोजन किया.
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को जल संकट, जल संचयन और जल संरक्षण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई. अर्चना वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जल संरक्षण के बिना भविष्य में जल संकट का समाधान मुश्किल होगा, और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदारी से कार्य करना होगा. उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों और विद्यालयों में जल का सही तरीके से उपयोग करें और जल के अपव्यय को रोकें.
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने भी जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि जल संकट को सुलझाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं. जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि जनपद में आज प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य शिक्षण संस्थानों में “पानी की पाठशाला” का आयोजन किया गया. इस पाठशाला में जल संरक्षण, जल बचाने के उपायों, और जल संचयन के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और समाज को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना था.
इसके साथ ही, समस्त ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर, चैकडेम और अन्य जल स्त्रोतों के पास ग्राम प्रधानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामवासियों ने मिलकर जल संरक्षण की शपथ ली. लगभग 8 लाख लोगों ने इस शपथ में भाग लिया और यह संकल्प लिया कि वे जल संरक्षण, जल संवर्धन और जल संचयन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे. इस अभियान से जल संकट को दूर करने के लिए जन भागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया. पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों में जल संरक्षण की भावना जागृत होगी, जो आने वाले समय में उनके समाज को लाभ पहुंचाएगी.
इस अवसर पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी नेहा ब्याडवाल, सीओ अर्चना सिंह, प्रबंधक सिंह आदि सहित संबंधित अधिकारी व स्कूल के बच्चे मौजूद रहे.
जल संचयन और जल संरक्षण हेतु पानी की पाठशाला का आयोजन
