जालौन: बुंदेलखंड के छोटे से गांव चमारी में रविवार को ज्ञान, संकल्प और सामाजिक परिवर्तन का एक अनोखा संगम देखने को मिला। यहां इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के संपादक और देश के ख्याति लब्ध पत्रकार सौरभ द्विवेदी की पहल पर बने “माता प्रसाद द्विवेदी पुस्तकालय” का भव्य लोकार्पण हुआ। इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, शिक्षाविद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति, राम कथा मर्मज्ञ और जाने-माने कवि डॉ. कुमार विश्वास और फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे सहित अनेक विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।
इस अवसर पर नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि उन्हें ऐसे भव्य पुस्तकालय की उम्मीद नहीं थी। यहां आया तो आश्चर्य से भर गया। उन्होंने कहा कि संकल्प तो बहुतेरे लेते हैं लेकिन हर कोई उसे पूरा नहीं कर पाता। राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश नारायण ने भी सौरभ की प्रशंसा में कई शब्द बोले । कहा कि सौरभ ने अपनी मेहनत और मेधा से देश में स्थान बनाया है। यह इस गांव के लिए भी गौरव की बात है। सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण समाज में बौद्धिक चेतना जगाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
दृष्टि आईएएस कोचिंग के संस्थापक और विचारक डॉ. विकास दिव्य कीर्ति ने सरल भाषा में सीखने के गुण को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में सीखने की क्षमता वयस्कों के मुकाबले बहुत अधिक होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि AI को लेकर घबराने की जरूरत नहीं बल्कि उसे समझने की आवश्यकता है। डॉ दिव्य कीर्ति ने कहा कि सरकार को नार्वे के मॉडल पर ध्यान देकर सरकारी स्कूलों को विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में यहां जो लड़कियां पढ़ने आएंगी, समाज उनका हौसला तोड़ने का प्रयास करेगा। देखियेगा, दस वर्ष बाद यही पुस्तकालय इतिहास बनायेगा। वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने अपने विशिष्ट अंदाज में कहा कि सृजनशीलता और ज्ञान ही समाज को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने युवाओं को पढ़ने की आदत विकसित करने और विचारों के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने का संदेश दिया।
फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे का इस कार्यक्रम के चलते पहली बार बुंदेलखंड क्षेत्र में आना हुआ था. इस अनुभव को उन्होंने शानदार बताया और कहा कि इस क्षेत्र के बारे में उन्होंने बहुत पढ़ा है। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबों से प्रेम और समाज के लिए काम करने की भावना ही किसी व्यक्ति को अलग बनाती है।
कार्यक्रम के मंच पर सौरभ की माँ मधु प्रभा द्विवेदी के हर शब्द ने तालियां बटोरीं। कहा कि सौरभ पर जो विश्वास किया उस पर मेरा बेटा सौ प्रतिशत खरा उतरा। उसकी मेहनत आज काम आई। अपने गांव और जिले का नाम रोशन कर दिया। मां – बाप को और क्या चाहिए ? वहीं पत्नी गुंजन सांगवान ने कहा कि हम साथ – साथ पढ़े। विचार मिले तो एक हो गए। पन्द्रह वर्ष पहले यहां बहू बनकर आई थी। यहां देखा कि महिलाओं को कई क्षेत्रों में वो अधिकार नहीं प्राप्त हैं जो पुरुष वर्ग के पास हैं। तब सोचा कि महिलाओं के लिए कुछ विशेष करना है।
100 पुस्तकालय बनाने का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान सौरभ द्विवेदी ने घोषणा की कि वे उनकी संस्था “देस राग” के माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र में ऐसे 100 पुस्तकालय स्थापित करना चाहते हैं , ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और ज्ञान का प्रसार हो सके। उन्होंने कहा “आज से मेरी संपत्ति और शरीर सब कुछ समाज को समर्पित करता हूँ।”
पुस्तकालय की विशेषताएं
माता प्रसाद द्विवेदी पुस्तकालय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां साहित्य, शिक्षा, इतिहास और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हजारों किताबों का संग्रह उपलब्ध है। साथ ही एक मोबाइल लाइब्रेरी ट्रक भी तैयार किया गया है, जो आसपास के गांवों में घूमकर बच्चों तक सैकड़ों किताबें पहुंचाएगा।
गांव में उमड़ा जनसैलाब
कार्यक्रम में जिले और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने इसे अपने क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया। उनका मानना है कि यह पुस्तकालय न केवल युवाओं को पढ़ने का वातावरण देगा, बल्कि आने वाले समय में बुंदेलखंड में शिक्षा और जागरूकता का नया अध्याय भी लिखेगा।

