विधायक ब्रजभूषण की पानी के लिए ज़मीनी जंग, क्या अपनी ही सरकार के खिलाफ़ खोल रहे मोर्चा?

महोबा: उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत मंगलवार को खुद गांवों में उतर गए. उन्होंने कई गांवों का दौरा कर व्यवस्था का निरीक्षण किया. इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने योजना के दावों पर सवाल खड़े कर दिए.

विधायक के अनुसार जिन गांवों को कागजों में ‘पूर्ण संतृप्त’ घोषित किया गया है, वहां कई घरों के बाहर केवल पाइप पड़े हैं, लेकिन नलों पर टोंटियां तक नहीं लगी हैं. कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कें खोद दी गईं, लेकिन मरम्मत तक नहीं कराई गई.

विधायक ने कहा कि चार साल बीत जाने के बावजूद गांवों में घर-घर पानी नहीं पहुंच पाया है. महिलाएं आज भी मीलों दूर से सिर पर कलश रखकर पानी लाने को मजबूर हैं.

नरेड़ी गांव से शुरू किया निरीक्षण
भाजपा विधायक ने मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे चरखारी विधानसभा क्षेत्र के गांवों का निरीक्षण शुरू किया. सबसे पहले वे नरेड़ी गांव पहुंचे. यहां उन्होंने करीब एक घंटे तक ग्रामीणों से बातचीत कर जल जीवन मिशन की स्थिति की जानकारी ली.
ग्रामीणों ने बताया कि योजना के तहत पाइपलाइन तो डाली गई, लेकिन अभी तक घरों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है.



महिला के कलश से विधायक ने पीया पानी
निरीक्षण के दौरान विधायक शाम करीब 4 बजे सालट गांव पहुंचे. यहां उन्हें एक महिला सिर और हाथ में पानी से भरा कलश लेकर जाती दिखाई दी. विधायक ने महिला को रोककर बातचीत की. महिला ने अपना नाम गोमती बताया. उसने बताया कि घर पर पानी नहीं आता और लगभग 500 मीटर दूर लगे एक नल से पानी भरकर लाना पड़ता है.

महिला ने विधायक से पूछा, “पानी पिएंगे क्या?”
इस पर विधायक ने मुस्कुराते हुए कहा, “हां, बिल्कुल पीऊंगा, मेहनत का पानी है।” इसके बाद उन्होंने महिला के कलश से पानी पी लिया. उस समय विभागीय अधिकारी और संबंधित ठेकेदार भी मौके पर मौजूद थे.

घरों के बाहर पाइप, लेकिन नलों में टोटी नहीं
निरीक्षण के दौरान कई गांवों में यह भी सामने आया कि घरों के बाहर पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नलों में टोटी तक नहीं लगाई गई है. ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू हुए चार साल हो चुके हैं, मगर अभी तक घरों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई. ग्रामीणों के अनुसार जलापूर्ति न होने की वजह से महिलाएं आज भी दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं.

सड़कें खोदकर छोड़ दीं, मरम्मत नहीं
पाइपलाइन डालने के लिए कई जगह सड़कों को खोदा गया था. लेकिन बाद में उनकी मरम्मत नहीं कराई गई. इससे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव की समस्या पैदा हो गई है. हालात देखकर विधायक नाराज हो गए. उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए बुंदेली कहावत सुनाई — “एक को मारें दुई मर जाएं, तीसर खौफ खाए मर जाए।”

मंत्री का काफिला रोककर उठाया था मुद्दा
दरअसल, 30 जनवरी को पानी की समस्या को लेकर भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का काफिला रोक लिया था. उस समय उनके साथ करीब 100 ग्राम प्रधान भी मौजूद थे. विधायक ने गांवों में पानी न पहुंचने का मुद्दा उठाया था. उस दौरान मंत्री ने समस्या के समाधान के लिए 20 दिन का समय मांगा था और भरोसा दिलाया था कि जलापूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी.

38 दिन बाद भी नहीं बदले हालात
विधायक का कहना है कि मंत्री द्वारा दी गई समयसीमा खत्म होने के बाद भी हालात नहीं सुधरे. 20 दिन की बजाय अब 38 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गांवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी. उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी मंत्री को गलत जानकारी दे रहे हैं और झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं.

SIT जांच की मांग
भाजपा विधायक ने कहा कि यदि चार साल बाद भी गांवों में पानी नहीं पहुंचा है तो यह बड़ी लापरवाही है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की SIT जांच कराने की मांग की है, ताकि जल जीवन मिशन के तहत हुए कामों की सच्चाई सामने आ सके. 

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