जालौन: 15 फरवरी रविवार को जनपद के कीर्तिशेष साहित्यकार हरि श्याम ‘पारथ’ जी की पुण्यतिथि एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर विवेकानंद श्रीवास्तव जी के आवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता जाने-माने साहित्यकार एवं अधिवक्ता पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी ने की. इस अवसर पर उपस्थित कवियों ने पारथ जी के विषय मे अपने संस्मरण सुनाकर उन्हें याद किया. कवयित्री शिखा गर्ग ने वाणी वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की.
जालौन से पधारे कवि एवं शिक्षक अभिषेक हर्षवर्धन ने पढ़ा
‘ये नश्तर क्यों चुभाए जा रहे हैं.
हमारा जख्म किसको दिख गया है’
सुप्रसिद्ध कवि पुष्पेंद्र पुष्प ने काव्य पाठ करते हुए कहा “सोचा तो कुछ और था मगर किया कुछ और. जीवन भर चलता रहा मन मंथन का दौर”
शिखा गर्ग ने महाशिवरात्रि पर कविता पढ़ते हुए सुनाया
” जय जय शिव योगी बनकर जोगी गौरा जी को वरन चले, सांपों की माला पहने छाला जटा मौर सिर भस्म मले”
योगाचार्य शत्रुघ्न सिंह सेंगर ने पढ़ा “जो बोया है सो मिलता है जो खोया है सो मिलता है आना-जाना इस दुनिया में बिछड़ गया फिर वो मिलता है”
वरिष्ठ कवयित्री डॉक्टर रेनू चंद्र ने काव्य पाठ करते हुए पढ़ा “हां मुझे कृष्ण से निस्बत है कृष्ण मेरे हैं सारी दुनिया से मोहब्बत है कृष्ण मेरे हैं”
कवि एवं शिक्षक राम शंकर गौर ने पढ़ा “चलो साथियों चले देखने होली का हुड़दंग। समता ममता मानवता के सब पर डालें रंग”
वरिष्ठ कवि सुरेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा “कई तीरंदाज यूं तो काबिले तारीफ हैं ‘चंद्र’ पारथ नाम की तो बात ही कुछ और है”
वरिष्ठ कवित्री माया सिंह माया ने पारथ जी को याद करते हुए कहा “हे अद्भुत काव्य रचयिता तुमको शत शत मेरा नमन. मेरे मन की पावन धड़कन करती है वंदन”
कवि ब्रह्मानंद खरे ने पढ़ा “जाने शाम कहां खो बैठी मेरे प्यारे बचपन की” कवयित्री सीता खरे ने भी सुंदर कविता सुनाई.
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर माया सिंह माया ने किया इस अवसर पर कीर्ति शेष माया हरि श्याम ‘पारथ’ जी के समस्त परिजन उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संयोजन मृणाल श्रीवास्तव जी ने किया.
‘पारथ जी’ की पुण्य तिथि पर हुई काव्य-गोष्ठी
