IIT रुड़की से UPSC तक का सफ़र, पढ़िए सफ़लता की दास्तां

जालौन: जिले के डकोर विकासखंड के मुहाना गांव की बेटी निकेता ने अपने अथक परिश्रम और दृढ़ संकल्प से बड़ी सफलता हासिल की है. निकेता ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 473वीं रैंक प्राप्त कर परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है. निकेता वर्तमान में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) मुंबई में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं.

आठवें प्रयास में मिली मंजिल
निकेता की सफलता एक लंबी संघर्ष यात्रा का परिणाम है. उन्होंने UPSC परीक्षा में कुल आठ प्रयास किए. इससे पहले वह तीन बार इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया था. लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर डटी रहीं. आखिरकार उनके धैर्य और मेहनत ने रंग दिखाया और उन्होंने 473वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार कर लिया.

केंद्रीय विद्यालय से IIT रुड़की तक का सफर
निकेता की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के केंद्रीय विद्यालय से हुई. उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की. इसके बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT रुड़की में हुआ. यहां से उन्होंने बीआर्क (B.Arch) यानी आर्किटेक्चर की पढ़ाई पूरी की. उच्च शिक्षा के बाद उन्होंने वर्ष 2016-17 से UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी. कठिन प्रतियोगिता और कई असफल प्रयासों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को कभी नहीं छोड़ा.

पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो में हुआ चयन
निकेता की मेहनत का परिणाम वर्ष 2025 में भी देखने को मिला था, जब उनका चयन इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) मुंबई में अधिकारी के रूप में हुआ. वर्तमान में वह वहीं सेवाएं दे रही हैं. अब UPSC में सफलता मिलने के बाद उनके लिए प्रशासनिक सेवा का रास्ता भी खुल गया है.

परिवार में खुशी का माहौल
निकेता के पिता रामपाल सिंह लोधी भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं. बेटी की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है. निकेता की बड़ी बहन एकता अहमदाबाद में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि भाई नीलसिंह लोधी इंदौर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं.

निकेता की सफलता पर उनके चाचा वीरसिंह सहित परिजनों और क्षेत्रवासियों ने खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी है. गांव और आसपास के क्षेत्र में भी उनकी उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है. निकेता की कहानी यह संदेश देती है कि लगातार प्रयास, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

About बुंदेलखंड रिपोर्ट ब्यूरो

View all posts by बुंदेलखंड रिपोर्ट ब्यूरो →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *