जालौन: जनपद-जालौन के ग्राम पंचायत नसीरपुर तक 3 किमी० लम्बाई तथा 5 मी० चौड़ाई की कच्ची सड़क होने से बरसात के मौसम में कीचड़ एवं दलदल बना रहता है, जिससे किसी भी प्रकार का आवागमन नहीं हो पाता है. वर्ष 1947 में स्वतंत्र हुये इस देश का लगभग 75 वर्ष बीत चुके हैं. अभी तक इस सड़क का पक्का कराया जाना सम्भव नहीं हो सका है. जिससे यहां के किसान ग्राम अटरिया, ग्राम नसीरपुर, ग्राम सधारा तथा आस-पास के लगभग 25 ग्रामों का आवागमन इसी कच्ची सड़क से होता आ रहा है. जिसे कानपुर झांसी हाईवे से भी मिलाया जा सकता है साथ ही एक दूसरे मौजे में कृषि कार्य भी करते हैं. पक्की सड़क न होने से बरसात के समय में पैदल, साईकिल, मोटरसाईकिल, ट्रैक्टर इत्यादि बड़े वाहन भी निकालने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
ऐसी स्थिति में कृषक अपने खेतों पर फसलों की जुताई, बखराई व बुआई आदि करने में मजबूर रहते हैं जिससे आर्थिक रूप से पिछड़े हुये हैं पक्की सड़क न होने से आवागमन की सुविधा नही हो पा रही है. यह तीनों ग्राम कृषि पर ही निर्भर हैं जलभराव के कारण कोई भी कृषि कार्य फसलों की पैदावार करने में असमर्थ हैं.
चुनाव बहिष्कार और जनप्रतिनिधियों को भी लिखा गया पत्र
इस रोड को बनवाने के लिए ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार भी किया था. सड़क की दुर्दशा को देखते हुए ग्राम प्रधान ने डीएम जालौन को 29 जुलाई 2024 को ज्ञापन दिया गया. वहीं लोकसभा सांसद को भी उसी दिन ज्ञापन दिया गया. लेकिन मिला तो सिर्फ़ आश्वासन. आख़िर उस झूठी तसल्ली का जनता क्या करे? विधायक गौरीशंकर वर्मा ने 31 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री को सड़क बनबाने के संबंध में पत्र लिखा गया. मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. अब परेशानी गांव वालों को झेलनी पड़ रही है. यहां तक कि पूर्व विधायक छोटे सिंह और विधायक गौरीशंकर वर्मा ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस बात को रखा. विधानसभा सचिवालय से उस सड़क को बनवाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र गया.
दी आंदोलन की चेतावनी
सात साल से अधर में लटके इस मार्ग को बनवाने के लिए ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया. उन्होंने 15 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है. यदि उस समय तक सड़क नहीं बनवाई जाती है तो 16 नवंबर को आन्दोलन होगा. ग्रामीणों की मांग है कि सड़क को जल्द से जल्द बनवाया जाए. जिससे सभी प्रकार की परेशानी को दूर किया जा सके.
चुनाव बहिष्कार और जनप्रतिनिधियों के वादे के बाद भी नहीं बन सकी ये सड़क
