पूर्व विधायक दीपनारायण यादव की 58 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क

झांसी: झांसी में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गरौठा विधायक दीप नारायण सिंह यादव (Deep Narayan Singh Yadav) एक बार फिर पुलिस के रडार पर हैं. मोठ थाना क्षेत्र में दर्ज डकैती और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों वाले मामले में उनका नाम सामने आने के बाद पुलिस अब उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर चुकी है. रविवार को उनके बेहद नजदीकी सहयोगी अशोक गोरखवानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उसके पास से 35 लाख 8 हजार रुपये भी बरामद किए गए हैं, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है. 

संपत्तियों की तलाश तेज, 58 करोड़ से अधिक की कीमत
पुलिस दीप नारायण सिंह यादव की नामी और बेनामी संपत्तियों को नए सिरे से खंगाल रही है. अब तक जिले में उनकी 28 संपत्तियों का पता लगाया जा चुका है, जिनकी बाजार कीमत करीब 58.44 करोड़ रुपये आंकी गई है. पुलिस इनके कुर्की की पूरी तैयारी कर रही है और माना जा रहा है कि जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है. 

7 महीने जेल में रहने के बाद मिली थी रिहाई 
पूर्व विधायक को 2022 में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब उन पर कुख्यात बदमाश लेखराज यादव को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने की कोशिश का आरोप लगा. 26 सितंबर 2022 को गिरफ्तारी के बाद तीन महीनों में ही उनके खिलाफ सात नए मुकदमे दर्ज हुए थे. लगभग सात महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी. 

गैंगस्टर एक्ट और 150 करोड़ की संपत्ति कुर्क
उरई और झांसी में उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) के मामले भी दर्ज हैं. इसी क्रम में पुलिस पहले ही उनकी 22 लग्जरी कारों समेत लगभग 150 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को कुर्क कर चुकी है. अब दूसरी बार भी कुर्की की तैयारी की जा रही है. 

लगातार नए मुकदमे और पुलिस की तलाश
10 अक्टूबर 2025 को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्रों से विवाद के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था. यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि 20 नवंबर को मोठ थाने में उनके खिलाफ डकैती और रंगदारी की गंभीर धाराओं में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई. इसके बाद पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है. 

30 जुलाई 2022 से शुरू हुआ केसों का सिलसिला
विजिलेंस ने 30 जुलाई 2022 को उनके खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद से लगातार अलग-अलग धाराओं में कई मामले दर्ज होते रहे हैं. पुलिस का कहना है कि अब जुटाए गए प्रमाणों के आधार पर उनके खिलाफ जल्द बड़ी कार्रवाई हो सकती है. 

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