जालौन: जिले के कोंच तहसील क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और सामाजिक न्याय की नींव पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहाड़गांव इंटर कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता पद पर तैनात एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल कर ली, जबकि उसकी वास्तविक जाति कुछ और है.
आरोपों के अनुसार, प्रवक्ता रामकिशोर ने अपनी असली पहचान छुपाकर स्वयं को अनुसूचित जाति (मझवार) का बताया और उसी आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी सेवा में प्रवेश कर लिया. बाद में जब इस पर सवाल उठे, तो मंडलायुक्त कार्यालय स्तर पर हुई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किया गया जाति प्रमाणपत्र कूटरचित है और आरोपी वास्तव में किसान पिछड़ी जाति से संबंधित है.
यह मामला तब और भावनात्मक हो गया, जब गांव के ही निवासी आलोक कुमार ने इसे सामाजिक अन्याय बताते हुए जिलाधिकारी जालौन से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई. शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल कागजों की हेराफेरी नहीं, बल्कि उस गरीब और योग्य अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के सपनों की चोरी है, जिसे उसका संवैधानिक अधिकार नहीं मिल सका.
आलोक कुमार ने जिलाधिकारी से मांग की है कि आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, उसकी नौकरी तत्काल समाप्त की जाए और अब तक मिले वेतन की रिकवरी की जाए. उनका कहना है कि अगर ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आरक्षण जैसी व्यवस्था का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा.
मंडलायुक्त स्तर की जांच में आरोपों की प्रारंभिक पुष्टि और अब जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत पहुंचने के बाद यह मामला गंभीर मोड़ ले चुका है. आरोपी प्रवक्ता की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं और पूरे जिले की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है. यह सिर्फ एक नौकरी का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और व्यवस्था की ईमानदारी की परीक्षा है.
फर्जी जाति प्रमाणपत्र से नौकरी हथियाने का आरोप, उसी के गांववाले ने खोल दिये राज़
