बांदा: जिला कारागार से स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रवि काना की बिना किसी वैध आदेश के रिहाई ने जेल प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है. मामला सामने आते ही उच्च स्तर पर कार्रवाई की गई और 24 घंटे के भीतर बांदा जेल के जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया. इस घटना को गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है.
जेल प्रशासन की ओर से शनिवार सुबह जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया कि बांदा जेल में निरुद्ध रवि काना को बी-वारंट के बावजूद रिहा कर दिया गया. प्रशासन ने इस लापरवाही की जिम्मेदारी सीधे जेलर पर तय की है. वहीं गौतमबुद्ध नगर सीजेएम कोर्ट ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है. अदालत ने पूछा है कि आरोपी को किस आधार पर छोड़ा गया और क्यों न संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
यह पूरा मामला वर्ष 2026 में दर्ज उस मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें गैंगस्टर रविंद्र उर्फ रवि नागर उर्फ रवि काना के खिलाफ नोएडा के थाना सेक्टर-63 में केस दर्ज किया गया था. आरोपी पहले से ही एक अन्य मामले में बांदा जेल में बंद था. इसी कारण नोएडा पुलिस ने 28 जनवरी को अदालत से बी-वारंट जारी कराया था, ताकि आरोपी को अनिवार्य रूप से पेश किया जा सके.
अदालती आदेश के अनुसार 29 जनवरी को आरोपी को बी-वारंट के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया. इसके बावजूद उसी दिन शाम 6.39 बजे रवि काना को बांदा जिला कारागार से रिहा कर दिया गया. जबकि नोएडा के मामले में उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही जारी थी और किसी भी प्रकार का रिहाई आदेश मौजूद नहीं था.
जेल अधीक्षक की सफाई और कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
मामले के तूल पकड़ने के बाद बांदा जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम ने सफाई पेश की. उन्होंने बताया कि रवि काना अगस्त 2024 से बांदा जेल में बंद था और उसके खिलाफ दर्ज 20 से अधिक मामलों में पहले ही रिहाई आदेश मिल चुके थे. अंतिम मामले में भी 28 जनवरी की सुबह रिहाई आदेश प्राप्त हो गया था.
जेल अधीक्षक के अनुसार पुलिस गार्ड उपलब्ध न होने के कारण 29 जनवरी को बी-वारंट पर आरोपी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई. शाम पांच बजे तक किसी प्रकार का कस्टडी वारंट या आगे का निर्देश प्राप्त नहीं हुआ. साढ़े छह बजे तक भी कोई ईमेल आदेश नहीं आने पर नियमित प्रक्रिया के तहत आरोपी को रिहा कर दिया गया.
जेल प्रशासन का कहना है कि रिहाई के लगभग डेढ़ घंटे बाद कस्टडी वारंट जेल की आधिकारिक मेल आईडी पर प्राप्त हुआ. तब तक आरोपी को छोड़ा जा चुका था. इसके बाद पूरी स्थिति से अदालत को अवगत कराया गया. सीजेएम कोर्ट ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए छह फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
गौतमबुद्ध नगर के सीजेएम संजीव कुमार त्रिपाठी ने इस पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने जेल प्रशासन के तर्कों को खारिज करते हुए रवि काना की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बी-वारंट पर तलब आरोपी को रिहा करना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है.
अदालत ने दो बिंदुओं पर जवाब मांगा है. पहला, जब आरोपी को बी-वारंट पर पेश किया जाना था, तब उसे किन परिस्थितियों में और किस आधार पर जेल से छोड़ा गया. दूसरा, जब रिमांड की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चल रही थी, तब बिना किसी आदेश के रिहाई क्यों की गई. साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या इस कृत्य के आधार पर जेल अधीक्षक के खिलाफ कस्टडी से आरोपी के भागने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए.
बिना आदेश बांदा जेल से रिहा हुआ गैंगस्टर रवि काना, जेलर सस्पेंड, सीजेएम कोर्ट सख्त
