महाभारत और राजा रंतिदेव ने जुडी कथा
किंवदंती और धार्मिक कथाओं के अनुसार प्राचीनकाल में रंतिदेव नाम के एक राजा ने देवताओं को खुश के लिए ‘चर्मवती’ के किनारे पर एक यज्ञ का आयोजन किया था. जिसे पूरा करने के लिए ऋषि-मुनियों के कहने पर हजारों जानवरों की बलि देकर उनके खून को इस जगह पर बहा दिया गया था. माना जाता ही की बाद में इन्हीं जानवरों के खून ने नदी का आकार ले लिया और चम्बल या चर्मवती का जन्म हुआ. इसी धार्मिक कथा के कारण चंबल नदी को एक अपवित्र नदी मानकर इसकी पूजा नहीं की जाती.
द्रौपदी का श्राप
महाकाव्य महाभारत के अनुसार प्राचीनकाल में चर्मवती यानी चंबल नदी के किनारे पर ही कौरवों और पांडवों के बीच चौसर का खेल या द्युत क्रीड़ा हुई थी, जिसमें पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी को दुर्योधन के हाथों हार गए. जिसके बाद कौरवों ने भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया था. इस घटना से आहत होकर ही द्रौपदी ने चंबल की पूजा-अर्चना से परहेज किए जाने का श्राप दिया था. इस श्राप के बाद चम्बल को एक श्रापित नदी मानकर कभी किसी ने चंबल नदी की पूजा नहीं की.
श्रवण कुमार और चंबल
यह भी किंवदंती है कि इस नदी का पानी पीने से लोग आक्रामक हो जाते हैं. किंवदंती के अनुसार एक बार माता पिता को कांवड़ से तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे श्रवण कुमार ने चंबल का पानी पीया तो उनमें भी आक्रामकता आ गई और माता-पिता पर गुस्सा होकर उन्हें वहीं छोड़कर चल दिए. हालांकि थोड़ी आगे जाने पर उन्हें एहसास हुआ तो उन्होंने क्षमा मांगी और साथ ले गए.
मध्य प्रदेश के जनापाव से चलती हुई चम्बल उत्तरप्रदेश में भरेह के पास पचनाडा में यमुना में मिल जाती है. इस नदी के किरदार, किस्से और कहानियां को भले ही किताबों और फिल्मों में डरावना दिखाया गया हो लेकिन वास्तव में इस नदी में सभी रंगों की कला, संस्कृति, परम्पराओं और रीती-रिवाजों का समावेश है. ये नदी लुप्त होती प्रजातियों से जनजातियों तक सबकी रक्षा करती है, अपने 5 बांधों से लाखों लोगों को सिंचाई का पानी और बिजली देती है और बिना भेदभाव किये हर किसी के जीवन को सवारती है.
चंबल का पानी पीते ही आख़िर क्यों श्रवण कुमार ने छोड़ दिया था अपने माता-पिता को, पार्ट 7
