जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में इंस्पेक्टर अरुण राय की संदिग्ध मौत का मामला अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। लगभग तीन महीने चली जांच के बाद पुलिस ने 6 मार्च 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जिसे 9 मार्च को कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया। इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे और स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय तक चर्चा और सवाल खड़े किए।
5 दिसंबर की रात क्या हुआ था?
घटना 5 दिसंबर 2025 की रात करीब 9:17 बजे की बताई जाती है। उस समय कुठौंद थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में इंस्पेक्टर अरुण राय मौजूद थे। अचानक उनके कमरे से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। जब पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे तो इंस्पेक्टर अरुण राय खून से लथपथ पड़े थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्हें उनकी ही सर्विस रिवाल्वर से गोली लगी थी। गोली सिर के आर-पार निकल गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोली चलने के बाद क्या हुआ?
गोली चलने के तुरंत बाद थाना परिसर में तैनात सिपाही मीनाक्षी कमरे से बाहर निकलकर जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसने आसपास मौजूद लोगों से कहा कि इंस्पेक्टर ने खुद को गोली मार ली है। इसके बाद वह वहां से तेजी से निकल गई। थाने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में मीनाक्षी को घटना के बाद परिसर से भागते हुए देखा गया। पुलिस के मुताबिक, इंस्पेक्टर को गोली लगने की सूचना सबसे पहले मीनाक्षी ने ही अधिकारियों को दी थी।
जन्मदिन को लेकर बढ़ा था विवाद
जांच में सामने आया कि 2 दिसंबर को सिपाही मीनाक्षी अपना जन्मदिन मनाने के लिए मेरठ स्थित अपने घर गई थी। बताया जाता है कि इस बात को लेकर इंस्पेक्टर अरुण राय नाराज थे। वे चाहते थे कि मीनाक्षी उनके साथ जन्मदिन मनाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 5 दिसंबर को मीनाक्षी इंस्पेक्टर के सरकारी आवास पर पहुंची थी। इसी दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई। पुलिस के अनुसार, इसी बहस के बाद अचानक गोली चलने की घटना हुई।
पत्नी की शिकायत पर दर्ज हुआ हत्या का मुकदमा
घटना के अगले दिन 6 दिसंबर को इंस्पेक्टर अरुण राय की पत्नी माया राय ने सिपाही मीनाक्षी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनके पति की मौत के पीछे मीनाक्षी की भूमिका है। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की और कुछ दिनों बाद मीनाक्षी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे विभागीय कार्रवाई के तहत नौकरी से सस्पेंड भी कर दिया गया।
90 दिन की जांच के बाद दाखिल हुई चार्जशीट
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने करीब 90 दिन तक साक्ष्य और परिस्थितियों की जांच की। जांच पूरी होने के बाद 6 मार्च 2026 को अदालत में 383 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई। चार्जशीट दाखिल होने के तीन दिन बाद, यानी 9 मार्च को अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। अब इस मामले में आगे की सुनवाई कोर्ट में होगी।
पूरे मामले पर टिकी लोगों की नजर
इंस्पेक्टर अरुण राय की मौत का मामला शुरुआत से ही चर्चा में रहा है। पुलिस महकमे के भीतर हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। अब अदालत में चलने वाली सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि उस रात आखिर क्या हुआ था और मौत की असली जिम्मेदारी किसकी है।
इंस्पेक्टर अरुण राय मौत मामला: 383 पन्नों की चार्जशीट में क्या है?
