मेडिकल कॉलेज के जन औषधि केंद्र पर छापेमारी से मचा हड़कंप, मरीजों के भरोसे पर लगा सवाल

जालौन: जनपद जालौन के मेडिकल कॉलेज परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र पर गुरुवार को हुई औषधि विभाग की छापेमारी ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया. जिस केंद्र को गरीब, जरूरतमंद और बीमार लोगों के लिए सस्ती और सुरक्षित दवाओं की उम्मीद माना जाता था, वहीं से अनाधिकृत और नियमों के विपरीत रखी गई दवाओं का मिलना आमजन के विश्वास पर गहरा आघात है. 

झांसी से पहुंची औषधि विभाग की टीम ने अचानक छापा मारकर जब जन औषधि केंद्र के स्टॉक और दस्तावेजों की जांच शुरू की, तो वहां अफरा-तफरी मच गई. जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. नियमों को ताक पर रखकर रखी गई दवाओं की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल प्रभाव से केंद्र की सेल और पर्चेज प्रक्रिया पर रोक लगा दी. यह फैसला न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा एक सख्त संदेश भी है. 

बताया जा रहा है कि जन औषधि केंद्र से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें दवाओं की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे. इसके साथ ही औषधि विभाग को औपचारिक शिकायत भी प्राप्त हुई थी. इन्हीं तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए सहायक आयुक्त औषधि, झांसी के नेतृत्व में टीम ने यह कार्रवाई की. 

छापेमारी के दौरान कर्मचारियों से पूछताछ की गई और जरूरी अभिलेख जब्त किए गए. प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस संस्थान पर हजारों मरीज अपनी जान और भरोसा सौंपते हैं, वहां इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक मानी जा रही है. 

जन औषधि केंद्र का उद्देश्य आम आदमी को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित दवाएं उपलब्ध कराना है. लेकिन यदि उसी केंद्र पर नियमों की अनदेखी हो, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि सामाजिक विश्वासघात भी है. इस घटना से मरीजों और उनके परिजनों में रोष और चिंता दोनों देखी जा रही है. 

औषधि विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच अभी जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. अब देखना यह है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होती है. 

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