सर्दियों का मौसम आते ही बाजारों में हरा-भरा बथुआ दिखने लगता है. उत्तर भारत में बथुआ को देसी सुपरफूड माना जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी है. आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी में बथुआ का सेवन शरीर को कई तरह से मजबूत बनाता है.
बथुआ आयरन, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन A और C से भरपूर होता है. सर्दियों में इसका सेवन खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है. खासकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह बेहद फायदेमंद माना जाता है.
सर्द मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं. बथुआ में मौजूद फाइबर कब्ज, गैस और अपच की समस्या को कम करता है. बथुआ का साग या सूप पेट को साफ रखने में सहायक होता है.
इम्युनिटी बढ़ाने के लिहाज से भी बथुआ अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण से शरीर की रक्षा करते हैं. नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. हड्डियों की मजबूती के लिए बथुआ में पाया जाने वाला कैल्शियम लाभकारी है. सर्दियों में जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों के लिए बथुआ का सेवन राहत दे सकता है.
स्वाद और उपयोग की बात करें तो बथुआ का साग, पराठा, रायता और सूप कई रूपों में खाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी के मौसम में सप्ताह में दो से तीन बार बथुआ जरूर शामिल करना चाहिए. कुल मिलाकर, सर्दियों में बथुआ न सिर्फ पारंपरिक स्वाद देता है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी एक संपूर्ण देसी औषधि है.
सर्दी में बथुआ खाने के फायदे. सेहत के लिए क्यों जरूरी है यह देसी साग?
